Edited By Sahil Kumar,Updated: 19 Mar, 2026 11:47 AM

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर 3.5–3.75% पर स्थिर रखी, जिससे सोना और चांदी पर दबाव बना रहा। निवेशकों ने मुनाफावसूली अपनाई, जिससे MCX पर सोना 151,930 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 2,44,150 रुपये प्रति किलो पर लुढ़क गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी...
नेशनल डेस्कः अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दर स्थिर रखने के फैसले और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोना और चांदी में लगातार दूसरे दिन गिरावट देखने को मिली। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों बाजारों में दबाव बना रहा, जिससे रिटेल बाजार में भी सोना 1,330 रुपये और चांदी 4,310 रुपये सस्ती हुई।।
फेड ने मार्च बैठक में अपनी ब्याज दर 3.5 फीसदी से 3.75 फीसदी के दायरे में अपरिवर्तित रखी और कड़े रुख का संकेत दिया। इससे बाजार में जल्द ब्याज दर कटौती की उम्मीदों को झटका लगा और बुलियन निवेश पर इसका असर तुरंत दिखा।
घरेलू बाजार में भी दबाव
MCX के वायदा बाजार में सोना और चांदी लगातार दूसरे दिन गिरावट में रहे। 19 मार्च को सोना 0.72 फीसदी टूटकर 151,930 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में यह 151,712 रुपये तक भी लुढ़क गया। वहीं, चांदी 1.63 फीसदी की गिरावट के साथ 2,44,150 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। विशेषज्ञों का मानना है कि फेड के फैसले के बाद निवेशकों ने मुनाफा लेने और सतर्क रुख अपनाने दोनों का संकेत दिया।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का हाल
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव बना रहा। स्पॉट गोल्ड 0.88 फीसदी गिरकर 4,848 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जबकि स्पॉट सिल्वर 2.41 फीसदी की गिरावट के साथ 75.6 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड कर रही थी।
रिटेल बाजार की कीमत
बुलियन वेबसाइट पर सोना 152,470 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा, जबकि चांदी 243,860 रुपये प्रति किलो पर बंद हुई। रिटेल स्तर पर सोना 1,330 रुपये और चांदी 4,310 रुपये सस्ती हुई।
गिरावट के पीछे कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल फेड के फैसले का असर नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भी बाजार पर दबाव डाल रही हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से महंगाई बढ़ने का खतरा रहता है, ऐसे समय में सोना और चांदी कभी सुरक्षित निवेश के रूप में चमकते हैं, तो कभी उच्च ब्याज दरों के दबाव में गिरावट का सामना करते हैं।
फेड चेयर जेरोम पॉवेल की टिप्पणियों पर भी निवेशकों की नजर रही। दरें स्थिर रखने का कदम उम्मीद के अनुरूप था, लेकिन कड़े संकेतों ने यह स्पष्ट कर दिया कि जल्द और आक्रामक दर कटौती की राह आसान नहीं है। यही कारण है कि सोना-चांदी में राहत की कोशिशों के बावजूद दबाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ।