Expert का दावा: बांग्लादेश के हालात भारत के लिए खतरनाक चेतावनी, पाकिस्तान उठा सकता मौके का फायदा

Edited By Updated: 21 Dec, 2025 07:37 PM

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बांग्लादेश में बढ़ती हिंसा और हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमलों को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने भारत के लिए गंभीर खतरे की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान जैसी ताकतें भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ाने का फायदा उठा सकती हैं।

International Desk: बांग्लादेश में बिगड़ते हालात को लेकर विदेश मामलों के विशेषज्ञ रॉबिंदर सचदेव ने भारत के लिए गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि पड़ोसी देश में बढ़ता एंटी-इंडिया सेंटिमेंट और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। म्यंमेनसिंह में हिंदू युवक दिपु चंद्र दास की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या पर प्रतिक्रिया देते हुए सचदेव ने इस स्थिति को “भारत के लिए बिल्कुल चिंताजनक” बताया। उन्होंने कहा कि भले ही बांग्लादेश सरकार ने इस मामले में 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, लेकिन यह केवल एक छोटा सा सकारात्मक कदम है।

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रॉबिंदर सचदेव ने कहा,“बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह भारत के लिए बेहद अलार्मिंग है। हमारी उम्मीद है कि ऐसी घटनाएं कभी दोबारा न हों। लेकिन वास्तविकता यह है कि वहां एंटी-इंडिया भावना तेजी से बढ़ रही है।” उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान और अन्य विदेशी एजेंसियां इस माहौल का फायदा उठा सकती हैं। “कुछ विदेशी ताकतें, खासकर पाकिस्तान, चाहेंगी कि भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़े। यह उनके हित में है।” सचदेव ने बांग्लादेश में हिंदू आबादी के लगातार घटते प्रतिशत को भी भारत के लिए बड़ी चिंता बताया और कहा कि वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।

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यह बयान उस घटना के बाद आया है जिसमें 18 दिसंबर को दिपु चंद्र दास पर कथित ईशनिंदा के आरोप लगाकर भीड़ ने उन्हें बेरहमी से पीटा, फिर शव को फांसी पर लटकाकर जला दिया गया। इस घटना के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी कड़ी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने बयान जारी कर कहा कि “नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।” अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने पुष्टि की है कि इस मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। हालांकि, मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस नीति जरूरी है।
 

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