Edited By Rohini Oberoi,Updated: 09 Jan, 2026 04:38 PM

अपनी प्राचीन भव्यता और आध्यात्मिक चेतना के लिए प्रसिद्ध श्री सोमनाथ मंदिर आज देश के सामने महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) का एक अनूठा मॉडल पेश कर रहा है। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की समावेशी नीतियों के कारण आज सैकड़ों महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनी...
वेरावल (गुजरात) : अपनी प्राचीन भव्यता और आध्यात्मिक चेतना के लिए प्रसिद्ध श्री सोमनाथ मंदिर आज देश के सामने महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment) का एक अनूठा मॉडल पेश कर रहा है। सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट की समावेशी नीतियों के कारण आज सैकड़ों महिलाएं न केवल आत्मनिर्भर बनी हैं बल्कि मंदिर के प्रबंधन में भी मुख्य भूमिका निभा रही हैं। वहीं मंदिर ट्रस्ट के विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से कुल 363 महिलाओं को सीधा रोजगार प्राप्त हो रहा है।
कार्यबल में महिलाओं की मजबूत भागीदारी
सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट में वर्तमान में कुल 906 कर्मचारी कार्यरत हैं जिनमें से 262 महिलाएं हैं। ट्रस्ट का यह दृष्टिकोण समाज में समान अवसर और समावेशी विचारधारा को बढ़ावा दे रहा है।
बिल्व वन: प्रकृति और पवित्रता का महिला नेतृत्व
मंदिर परिसर में स्थित पवित्र बिल्व वन की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर है। यहां 16 महिलाएं पर्यावरण संरक्षण, हरियाली और स्वच्छता का कार्य देखती हैं। यह पहल दर्शाती है कि महिलाएं धार्मिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों को कितनी कुशलता से संभाल सकती हैं।
सेवा और प्रसाद वितरण में समर्पण
मंदिर की दैनिक व्यवस्था में महिलाओं का योगदान सराहनीय है। 30 महिलाएं हजारों श्रद्धालुओं को प्रेम और सेवाभाव से भोजन परोसने का कार्य करती हैं। प्रसाद काउंटर और वितरण व्यवस्था में 65 महिलाएं तैनात हैं जिनका अनुशासन और विश्वसनीयता श्रद्धालुओं का दिल जीत लेती है।
आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक प्रभाव
मंदिर ट्रस्ट के विभिन्न प्रकल्पों के माध्यम से कुल 363 महिलाओं को सीधा रोजगार प्राप्त हो रहा है। ये महिलाएं सालाना लगभग 9 करोड़ रुपए की सामूहिक आय अर्जित कर रही हैं। यह आर्थिक मजबूती उनके जीवन स्तर में सुधार ला रही है और समाज के सर्वांगीण विकास में योगदान दे रही है।
आध्यात्मिक विरासत और सामाजिक दायित्व का संगम
श्री सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने यह सिद्ध कर दिया है कि धार्मिक संस्थान अपनी आध्यात्मिक जड़ों से जुड़े रहकर भी आधुनिक सामाजिक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं। आज सोमनाथ धाम से न केवल मंत्रोच्चार बल्कि महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वाभिमान की सुगंध भी चारों ओर फैल रही है।