Stray Dog: कब काट ले, कोई नहीं जानता — आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य सरकारों को दी चेतावनी

Edited By Updated: 07 Jan, 2026 02:18 PM

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देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी कुत्ते के व्यवहार का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं है और यह कहना गलत होगा कि कब कौन हमला कर देगा, यह समझा जा...

नेशनल डेस्क: देशभर में बढ़ते आवारा कुत्तों के खतरे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि किसी कुत्ते के व्यवहार का पहले से अनुमान लगाना संभव नहीं है और यह कहना गलत होगा कि कब कौन हमला कर देगा, यह समझा जा सकता है। इसी आधार पर कोर्ट ने नियमों के पालन में ढिलाई बरतने वाले राज्यों को चेतावनी दी कि यदि उन्होंने जवाब नहीं दिया तो उनके खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।

यह सुनवाई न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ के समक्ष हुई। कोर्ट ने दोहराया कि उसका उद्देश्य कोई नया कानून बनाना नहीं, बल्कि यह देखना है कि पहले से बने नियमों और आदेशों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं। न्यायमूर्ति मेहता ने स्पष्ट कहा कि अब तक कई राज्यों ने न तो संतोषजनक जवाब दिया है और न ही जमीनी स्तर पर काम किया है।

इससे पहले दिए गए आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने संस्थागत परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाकर उनकी नसबंदी और टीकाकरण कराने के बाद उन्हें उपयुक्त आश्रयों में रखने के निर्देश दिए थे। अदालत ने माना कि इस व्यवस्था का सही क्रियान्वयन नहीं हो पाया है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राजस्थान का उदाहरण देते हुए एक गंभीर टिप्पणी भी की। अदालत ने बताया कि राजस्थान हाईकोर्ट के दो न्यायाधीश सड़क दुर्घटना का शिकार हुए हैं, जिनमें से एक अब भी रीढ़ की हड्डी की गंभीर चोट से जूझ रहे हैं। इस संदर्भ को कोर्ट की ओर से बेहद गंभीर संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि वह दोनों पक्षों की बात पूरी तरह सुनना चाहती है। पीठ ने कहा कि पहले पीड़ितों की बात सुनी जाएगी, उसके बाद पशु प्रेमियों को अपनी दलीलें रखने का पूरा अवसर मिलेगा, ताकि किसी को यह शिकायत न रहे कि उसकी आवाज दबाई गई।

डॉग लवर्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में तर्क रखा कि सभी आवारा कुत्तों को आश्रय स्थलों में रखना न तो व्यावहारिक है और न ही आर्थिक रूप से संभव। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था कुत्तों और इंसानों, दोनों के लिए जोखिम भरी हो सकती है। सिब्बल ने जोर देकर कहा कि समस्या का समाधान वैज्ञानिक और संतुलित तरीके से ही निकल सकता है, लेकिन असली दिक्कत यह है कि मौजूदा कानूनों का पालन नहीं किया जा रहा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि आवारा कुत्तों से केवल रेबीज का खतरा ही नहीं बढ़ता, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है। कोर्ट का मानना है कि जब तक राज्य अपनी जिम्मेदारी गंभीरता से नहीं निभाएंगे, तब तक यह समस्या और विकराल होती जाएगी।

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