Edited By Anu Malhotra,Updated: 13 Jan, 2026 01:12 PM

देश में सड़क पर घूमते कुत्तों (stray dogs) की समस्या सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर गर्म बहस का विषय बनी। अदालत में आज कई पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं—कुत्तों के अधिकारों, आम लोगों की सुरक्षा और डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी को लेकर।
नई दिल्ली: देश में सड़क पर घूमते कुत्तों (stray dogs) की समस्या सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर गर्म बहस का विषय बनी। अदालत में आज कई पक्षों ने अपनी दलीलें पेश कीं—कुत्तों के अधिकारों, आम लोगों की सुरक्षा और डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी को लेकर।
सरकारी वकील का दावा: ABC नियमों की भावना करुणामय प्रबंधन है
गायिका मोहित चौहान के वकील ने अदालत को बताया कि ABC नियमों का मकसद कुत्तों का करुणामय प्रबंधन है। उन्होंने कहा कि कई विदेशी देशों में कुत्तों के देखभालकर्ताओं और फीडर्स को सरकारी एजेंसियों के साथ काम करने का अधिकार मिलता है। उनका कहना था, “मैं सिर्फ फीडर्स को मान्यता देना चाहता हूं। हमें जिम्मेदारी दें।”
अदालत का रुख: फीडर्स को भी जिम्मेदार बनाओ
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने फीडर्स पर भी कड़ी चेतावनी दी। न्यायाधीशों ने कहा, “जब कुत्तों से काटने या मौतें होती हैं, तो फीडर्स भी जिम्मेदार हैं। उन्हें अपने घर में रखें। क्यों उन्हें खुला छोड़ दिया जाए, जिससे वे काटें और डर फैलाएं?”
कुत्तों से घायल हुए व्यक्ति की अपील: करुणा जरूरी
एक डॉग बाइट पीड़ित ने अदालत में कहा कि कुत्तों में भयजनित आक्रामकता होती है। “मुझे एक समुदाय कुत्ते ने काटा। यह कुत्ता लंबे समय तक प्रताड़ित किया गया था। डर पैदा होने पर ही यह आक्रामक हुआ। हम मानवता के नाम पर उनके प्रति करुणा दिखाएं।”
केंद्र और राज्यों की आलोचना
बेंच ने केंद्र और राज्यों को फटकार लगाई। “आपने ABC नियमों को लागू करने में पूरी तरह विफलता दिखाई है। यह समस्या 1950 के बाद और बढ़ी है। हर उस व्यक्ति के लिए जिसने कुत्ते के काटने से अपनी जान गंवाई, हम संबंधित सरकारों से भारी मुआवजा वसूल करेंगे।”
कानून की सीमाएं
कई वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने कहा कि वर्तमान नियम समस्या का समाधान करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने अदालत से कहा कि यदि कानून पर्याप्त नहीं है, तो संविधान के आर्टिकल 142 और 32 के तहत अदालत को हस्तक्षेप करने का अधिकार है।
विवादित बिंदु: सार्वजनिक स्थानों में कुत्तों की जगह
सुप्रीम कोर्ट में बहस चली कि सड़क के कुत्ते गेटेड सोसाइटी, हवाई अड्डे और सार्वजनिक स्थानों पर नहीं रह सकते। वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने कहा, “यदि इंसान वहां नहीं रह सकता, तो जानवर क्यों? उन्हें हटाया जा सकता है, और वापस नहीं लौटना चाहिए।”
बेंच ने वकीलों और पशु प्रेमियों पर जताई नाराजगी
अदालत ने कहा कि लगता है भावनाएं सिर्फ कुत्तों के लिए हैं। वकील मेनका गुरुस्वामी ने जवाब दिया कि इंसान और पशु दोनों की सुरक्षा के मुद्दे हैं, और संसद ने 1950 से इस विषय पर ध्यान दिया।