आप सरकार को सुप्रीम कोर्ट का करारा झटका, नहीं रोक सकते पंजाब केसरी का प्रेस

Edited By Updated: 20 Jan, 2026 11:40 AM

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सुप्रीम कोर्ट ने ‘पंजाब केसरी’ अख़बार को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने पंजाब राज्य को अख़बार के प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया है। यह फैसला तब आया जब अख़बार ने प्रेस पर राज्य की संभावित कार्रवाई के खिलाफ न्यायिक...

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ‘पंजाब केसरी’ अख़बार को अंतरिम राहत प्रदान की है। अदालत ने पंजाब राज्य को अख़बार के प्रिंटिंग प्रेस के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से रोक दिया है। यह फैसला तब आया जब अख़बार ने प्रेस पर राज्य की संभावित कार्रवाई के खिलाफ न्यायिक संरक्षण की मांग की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पंजाब राज्य को निर्देश दिया है कि वह 'पंजाब केसरी' अख़बार के प्रकाशन के खिलाफ कोई भी जबरदस्ती कार्रवाई न करे। यह आदेश पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस मामले के निर्णय का इंतजार करते हुए दिया गया है, जिसमें अख़बार प्रबंधन ने राज्य की कार्रवाई के खिलाफ याचिका दाखिल की थी।

पंजाब केसरी का प्रिंटिंग प्रेस बिना किसी रुकावट के काम करता रहे
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अख़बार का प्रिंटिंग प्रेस बिना किसी रुकावट के काम करता रहे, जब तक हाईकोर्ट का फैसला नहीं आ जाता। यह अंतरिम आदेश हाईकोर्ट के फैसले तक और उसके एक सप्ताह बाद तक लागू रहेगा, ताकि पक्षकारों को अपीलीय उपाय अपनाने का समय मिल सके।

अदालत ने यह आदेश चीफ जस्टिस सूर्या कांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली की खंडपीठ ने सुनाया। वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने सुबह अदालत में अख़बार की ओर से यह मामला रखा। रोहतगी ने बताया कि अख़बार ने राज्य सरकार के खिलाफ कुछ आलोचनात्मक लेख प्रकाशित किए, जिसके तुरंत बाद प्रबंधन के खिलाफ कई जबरदस्ती कदम उठाए गए। इसमें बिजली काटना, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नोटिस, अख़बार मालिकों के होटल बंद करना और एफआईआर दर्ज करना शामिल था। रोहतगी ने कहा, “सिर्फ इसलिए कि हमने कुछ लेख प्रकाशित किए जो सरकार के अनुकूल नहीं थे, ये सब दो दिनों में किया गया। पिछले 20 साल से काम कर रहे प्रेस को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया, पानी के प्रदूषण के बहाने।”

उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट ने याचिका पर कल निर्णय सुरक्षित रख लिया था, लेकिन कोई अंतरिम राहत नहीं दी गई थी। इसलिए विशेष अवकाश याचिका दायर की गई और आज ही इसे सुनवाई के लिए रखा गया। रोहतगी ने जोर देकर कहा, "अख़बार को इसलिए बंद नहीं किया जा सकता कि कुछ लेख प्रकाशित किए गए।"

अख़बार को बंद नहीं किया जा सकता
पंजाब की ओर से अतिरिक्त सरकारी अधिवक्ता (AAG) शादान फ़रासत ने कहा कि राज्य की सभी कार्रवाई कानून के अनुसार की गई। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट का फैसला जल्द आने की संभावना है और फिलहाल जो कदम उठाए गए हैं, वह पूरी तरह सही हैं।

चीफ जस्टिस सूर्या कांत ने कहा, "ठीक है, अख़बार को बंद नहीं किया जा सकता।" अदालत ने स्पष्ट किया कि अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठान, जैसे होटल, अलग मामले में स्थगन रह सकता है, लेकिन अख़बार का प्रकाशन जारी रहना चाहिए।

अदालत ने अपने आदेश में कहा, "दोनों पक्षों के अधिकारों को नुकसान पहुंचाए बिना और मामले के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त किए बिना, पंजाब केसरी का प्रिंटिंग प्रेस बिना रुकावट के काम करता रहेगा। अन्य व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के मामले में, जैसे होटल, वर्तमान स्थिति बरकरार रहेगी। यह अंतरिम व्यवस्था हाईकोर्ट के निर्णय और उसके एक सप्ताह बाद तक लागू रहेगी ताकि प्रभावित पक्ष उचित मंच पर अपील कर सके।" इस निर्णय से ‘पंजाब केसरी’ प्रबंधन को बड़ी राहत मिली है और राज्य सरकार की कोई भी तत्काल जबरदस्ती कार्रवाई फिलहाल रोकी गई है।

 

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