बंगाल में भाजपा सत्ता में है... लोगों की सेवा करने के बजाय ...सत्ता हथियाने में लगी है - कांग्रेस नेता गौरव गोगोई

Edited By Updated: 11 Jun, 2026 01:54 PM

the bjp is in power in bengal  instead of serving the people  it is busy sei

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के भीतर बगावत के बाद तृणमूल गंभीर संकट का सामना कर रही है, पार्टी के एक-एक करके अब तक 60 से ज्यादा विधायक बागी हो गए हैं। 3 राज्य सभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। इसे...

 नेशल डेस्क: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के भीतर बगावत के बाद तृणमूल गंभीर संकट का सामना कर रही है, पार्टी के एक-एक करके अब तक 60 से ज्यादा विधायक बागी हो गए हैं। 3 राज्य सभा सांसदों ने पार्टी छोड़ दी है और राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया है। इसे लेकर तृणमूल कांग्रेस भाजपा पर पार्टी तोड़ने का आरोप लगा रही है। तो वहीं कांग्रेस भी इसे लोकतंत्र के खिलाफ बता रही है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेता गौरव गोगोई ने बीजेपी को कड़ी नसीत दी है। उन्होंने कहा कि आज बंगाल में भाजपा सत्ता में है। उन्हें लोगों की सेवा करनी चाहिए और अपने घोषणापत्र में किए गए वादों को पूरा करना चाहिए। इसके बजाय वे सत्ता हथियाने में ही लगे हुए हैं... जब तक भाजपा सत्ता में रहेगी, देश की मुख्य समस्याएं हल नहीं होंगी, भले ही वे लोकतंत्र को कमजोर करके सत्ता हासिल कर लें। 

तीसरे सांसद ने पार्टी से दिया इस्तीफा 
आप को बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बराइक ने बृहस्पतिवार को उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इस सप्ताह इस्तीफा देने वाले वह पार्टी के तीसरे सांसद हैं। सूत्रों के अनुसार, बराइक ने राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंपा। अपने इस्तीफे में पश्चिम बंगाल से सांसद बराइक ने लिखा, ''मैं राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देता हूं, जिसे कृपया तत्काल प्रभाव से स्वीकार किया जाए।

जनजातीय मामलों की परामर्शदात्री समिति के रहे सदस्य 
 उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सहयोग के लिए सभापति, उपसभापति और राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों का भी आभार व्यक्त किया। पश्चिम बंगाल के एक आदिवासी नेता बराइक उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण पर संसद की स्थायी समिति तथा जनजातीय मामलों की परामर्शदात्री समिति के सदस्य थे। उनका इस्तीफा ऐसे समय आया है जब तृणमूल कांग्रेस से लगातार इस्तीफे हो रहे हैं।

इन ज्यसभा सदस्यों ने छोड़ दी TMC
 सोमवार को राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने उच्च सदन की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था और बाद में तृणमूल नेतृत्व से मतभेदों का हवाला देते हुए पार्टी छोड़ने की घोषणा की थी। इसके बाद बुधवार को राज्यसभा सदस्य सुष्मिता देव ने संसद और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। बाद में देव ने नयी दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा से मुलाकात की, जिससे उनके भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर अटकलें तेज हो गईं। बराइक के इस्तीफे के साथ ही तृणमूल कांग्रेस इस सप्ताह अपने तीन राज्यसभा सदस्यों को खो चुकी है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पार्टी को एक और बड़ा झटका लगा है। 

रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में नए विपक्षी दल के रूप में मिली मान्यता 
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के भीतर बगावत के बाद तृणमूल गंभीर संकट का सामना कर रही है, जिससे उसकी संगठनात्मक और विधायी ताकत काफी कमजोर हुई है। पिछले सप्ताह पार्टी के दो-तिहाई से अधिक (80 में से 58) विधायक आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस विधायक दल से अलग हो गए और निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी समूह के रूप में मान्यता प्राप्त कर ली।

सांसद सायोनी घोष विपक्षी सांसदों के गुट में हुई शामिल 
बागी गुट का दावा है कि तब से उसकी संख्या और बढ़ी है। यह संकट बाद में संसद तक भी पहुंच गया। बागी सांसदों के समूह का नेतृत्व कर रहीं काकोली घोष दस्तीकार ने दावा किया कि उन्हें लोकसभा के 20 से अधिक सांसदों का समर्थन प्राप्त है। बुधवार को जादवपुर से सांसद सायोनी घोष और कोलकाता दक्षिण से सांसद माला रॉय भी असंतुष्ट सांसदों के खेमे में शामिल हो गईं। 
 

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