सावधान! जोर से छोड़नी पड़ रही है सांस तो जान लें कहीं इस खतरनाक बीमारी का संकेत तो नहीं?

Edited By Updated: 14 Jan, 2026 01:20 PM

the part of the brain that controls your breathing is increasing your bp

मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐसी खोज हुई है जो हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के इलाज का नजरिया हमेशा के लिए बदल सकती है। अब तक डॉक्टर मानते थे कि ब्लड प्रेशर का संबंध मुख्य रूप से दिल और खून की धमनियों से है लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड के...

Blood Pressure: मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐसी खोज हुई है जो हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के इलाज का नजरिया हमेशा के लिए बदल सकती है। अब तक डॉक्टर मानते थे कि ब्लड प्रेशर का संबंध मुख्य रूप से दिल और खून की धमनियों से है लेकिन यूनिवर्सिटी ऑफ ऑकलैंड के वैज्ञानिकों ने पाया है कि दिमाग का एक छोटा सा हिस्सा ब्लड प्रेशर को बढ़ाने में मुख्य विलेन की भूमिका निभा रहा है। हैरानी की बात यह है कि दिमाग का यह हिस्सा अब तक केवल सांस लेने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए जाना जाता था।

सांस और BP का खतरनाक कनेक्शन

दिमाग के जिस हिस्से पर यह रिसर्च केंद्रित है उसे मेडिकल भाषा में लैटरल पैराफेशियल रीजन ($pFL$) कहा जाता है। यह दिमाग के सबसे निचले हिस्से (ब्रेनस्टेम) में होता है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जब हम जोर से सांस छोड़ते हैं (जैसे हंसते, खांसते या भारी कसरत करते समय), तो यह $pFL$ हिस्सा एक्टिव हो जाता है। रिसर्च के अनुसार $pFL$ क्षेत्र न केवल फेफड़ों को संकेत देता है बल्कि उन नसों को भी सक्रिय कर देता है जो रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को सिकोड़ देती हैं। जब ये नसें सिकुड़ती हैं तो खून का दबाव यानी ब्लड प्रेशर तुरंत बढ़ जाता है।

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चूहों पर सफल रहा प्रयोग: मिला इलाज का सूत्र

प्रोफेसर जूलियन पैटन के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त चूहों पर एक प्रयोग किया। उन्होंने देखा कि हाइपरटेंशन के दौरान चूहों के दिमाग का यह $pFL$ हिस्सा जरूरत से ज्यादा सक्रिय था। जैसे ही वैज्ञानिकों ने इस हिस्से की गतिविधि को तकनीक के जरिए दबाया या कम किया चूहों का बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर तुरंत नॉर्मल लेवल पर आ गया। इससे यह साबित हो गया कि ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने का रिमोट दिमाग के इस छोटे से हिस्से के पास भी है।

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क्या आपकी सांस लेने की आदत बढ़ा रही है खतरा?

रिसर्च में बताया गया है कि जो लोग बार-बार सांस लेने का पैटर्न बदलते हैं या जिन्हें स्लीप एपनिया (नींद में सांस रुकना) की बीमारी है उनमें ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। जब शरीर में ऑक्सीजन कम होती है, तो पेट की मांसपेशियां सांस छोड़ने के लिए ज्यादा मेहनत करती हैं। यही मेहनत $pFL$ न्यूरॉन्स को उत्तेजित करती है जो अंततः हाइपरटेंशन का कारण बनती है।

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भविष्य की उम्मीद: बिना दवा के इलाज संभव?

विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इंसानों पर इस रिसर्च के लागू होने से ऐसे इलाज विकसित किए जा सकेंगे जो सीधे दिमाग के इन न्यूरॉन्स पर काम करेंगे। यह उन मरीजों के लिए वरदान होगा जिन पर हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं असर नहीं करतीं।

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