प्रदेश के साढ़े सात हजार गो आश्रय स्थल बनेंगे ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्रोडक्शन सेंटर

Edited By Updated: 12 May, 2026 09:22 PM

the state s 7 500 cow shelters will be transformed into organic fertilizer produ

उत्तर प्रदेश में कभी निराश्रित गोवंश, गो तस्करी और अवैध बूचड़खानों को लेकर चर्चा होती थी, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश अब गोसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के रूप में पहचान बना रहा है।

नेशनल डेस्क : उत्तर प्रदेश में कभी निराश्रित गोवंश, गो तस्करी और अवैध बूचड़खानों को लेकर चर्चा होती थी, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश अब गोसंरक्षण, प्राकृतिक खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के नए मॉडल के रूप में पहचान बना रहा है।

योगी सरकार अब प्रदेश की लगभग 7,500 गो आश्रय स्थलों को ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने जा रही है। इससे ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा। योगी सरकार का लक्ष्य गोसंरक्षण को केवल धार्मिक या सांस्कृतिक भावना तक सीमित न रखकर उसे किसानों की आय, प्राकृतिक खेती, महिला सशक्तीकरण और ग्रामीण रोजगार से जोड़ना है।

गोशालाएं बनेंगी प्रोडक्शन सेंटर

गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि प्रदेश के लगभग साढ़े सात हजार गो आश्रय स्थलों में इस समय साढ़े बारह लाख गोवंश संरक्षित हैं। योगी सरकार अब इन गोशालाओं को ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर प्रोडक्शन सेंटर के रूप में विकसित करने जा रही है। गोबर और गोमूत्र आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल को बढ़ावा देकर किसानों की खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने की रणनीति बनाई गई है। एक गाय से प्रतिदिन लगभग 5 लीटर गोमूत्र और 10 किलोग्राम गोबर प्राप्त होता है। यही संसाधन जैविक खाद, प्राकृतिक कीटनाशक और अन्य गो आधारित उत्पादों के निर्माण में उपयोग किए जाएंगे। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी।

प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र स्थापित होगा

योगी सरकार ने 2000 करोड़ रुपये गोसंरक्षण अभियान के लिए मंजूर किए हैं, जबकि वृहद गोसंरक्षण केंद्रों की स्थापना के लिए अलग से 100 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। इस प्रकार कुल 2100 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। प्रदेश में 155 वृहद गोसंरक्षण केंद्रों का निर्माण भी तेजी से चल रहा है। योगी सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में प्रत्येक जिले में कम से कम एक बड़ा आत्मनिर्भर गोसंरक्षण केंद्र स्थापित किया जाए।

महिलाएं और एफपीओ बनेंगे गोसंरक्षण मिशन की ताकत

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अब महिला स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को भी गोआश्रय स्थलों के संचालन से जोड़ा जाएगा। योगी सरकार की योजना है कि हर जिले में चयनित महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर गोवंश की देखभाल, पोषण, जैविक खाद निर्माण और उत्पाद प्रबंधन का जिम्मा दिया जाए। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार मिलेगा, गांवों में आय के नए स्रोत विकसित होंगे और गोसंरक्षण आंदोलन जनभागीदारी आधारित मॉडल के रूप में मजबूत होगा। योगी सरकार गोसेवा को ग्रामीण समृद्धि और महिला आत्मनिर्भरता का माध्यम बनाने की दिशा में काम कर रही है।

डीबीटी से बढ़ी पारदर्शिता, पशुपालकों को सीधा लाभ

मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के अंतर्गत अब तक लगभग सवा लाख पशुपालकों को 1.80 लाख से ज्यादा गोवंश सुपुर्द किए जा चुके हैं। गोवंश के भरण-पोषण के लिए सरकार 50 रुपये प्रतिदिन प्रति गोवंश की दर से डीबीटी के माध्यम से सीधे पशुपालकों के बैंक खातों में राशि भेज रही है। इस व्यवस्था से भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगा है और पारदर्शिता बढ़ी है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिली है।

2017 के बाद बदले हालात, गोसंरक्षण के लिए सीएम योगी के नेतृत्व में सबसे ज्यादा काम

उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में गो तस्करी की घटनाएं आम थीं, लेकिन योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अवैध बूचड़खानों पर सख्त कार्रवाई कर उन्हें पूरी तरह बंद कर दिया गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में गोसंरक्षण के क्षेत्र में जितना व्यापक और संगठित काम किया गया, उतना पहले कभी नहीं हुआ। यही वजह है कि आज उत्तर प्रदेश गोसंरक्षण के लिए सबसे ज्यादा काम करने वाला देश का पहला राज्य बनकर उभरा है।

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