Edited By Tanuja,Updated: 23 Mar, 2026 06:03 PM

होर्मुज स्ट्रेट पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय तेल टैंकर फंसने की खबरें सामने आईं, लेकिन युआन में भुगतान वाली बात को भारत ने फर्जी बताया। ईरान वैकल्पिक मुद्रा पर विचार कर रहा है, जिससे पेट्रोडॉलर सिस्टम को चुनौती मिल सकती है और वैश्विक तेल बाजार...
International Desk: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच Strait of Hormuz एक बार फिर वैश्विक चिंता का केंद्र बन गया है। इस समुद्री मार्ग से दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल गुजरता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ता है। हाल ही में यह खबर सामने आई कि होर्मुज स्ट्रेट के पास भारतीय झंडे वाले कई तेल टैंकर फंसे हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 22 भारतीय जहाज इस क्षेत्र में रुके हुए हैं, जिनमें बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस लदी हुई है। भारत सरकार इन जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार संपर्क में है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में ईरान के अधिकारियों ने कहा है कि डॉलर के बजाय युआन में भुगतान पर विचार हो सकता है। सीमित जहाजों को ही अनुमति दी जाएगी। यह रणनीति अमेरिका के आर्थिक दबदबे को कमजोर करने के लिए हो सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह वैश्विक तेल व्यापार में बड़ा बदलाव होगा।
भारत की कूटनीति
भारत इस संकट में बेहद सावधानी से कदम उठा रहा है । Narendra Modi सीधे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। S. Jaishankar लगातार ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi से संपर्क बनाए हुए हैं। उनका कहना है कि भारत की रणनीति सभी पक्षों से अच्छे संबंध बनाए रखना,बिना टकराव के अपने हित सुरक्षित करना है। इस बीच सोशल मीडिया पर यह दावा किया गया कि एक भारतीय टैंकर ने चीन की मुद्रा युआन में भुगतान करके होर्मुज से गुजरने की अनुमति हासिल की। हालांकि Ministry of External Affairs ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे फर्जी और भ्रामक बताया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत ने इस तरह का कोई कदम नहीं उठाया है। मामले की पृष्ठभूमि में ईरान के कुछ अधिकारियों के बयान सामने आए हैं, जिनमें कहा गया कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने के लिए अमेरिकी डॉलर के बजाय अन्य मुद्राओं, खासकर युआन में भुगतान पर विचार किया जा सकता है। यह प्रस्ताव अभी औपचारिक रूप से लागू नहीं हुआ है, लेकिन इसे अमेरिका के पेट्रोडॉलर सिस्टम को चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
पेट्रोडॉलर और पेट्रोयुआन सिस्टम क्या है?
1970 के दशक से दुनिया में तेल की खरीद-बिक्री अमेरिकी डॉलर में होती है। इसे पेट्रोडॉलर सिस्टम कहा जाता है। इससे अमेरिका को फायदा होता है और डॉलर की वैश्विक मांग बनी रहती है जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है। चीन ने 2018 में पेट्रोयुआन सिस्टम शुरू किया, जिसमें तेल का व्यापार युआन में किया जाता है। Vladimir Putin भी डॉलर से दूरी बनाने की नीति अपना रहे हैं। ईरान और वेनेजुएला जैसे देश पहले से ही डॉलर के बजाय अन्य मुद्राओं में व्यापार कर रहे हैं। इससे धीरे-धीरे डॉलर का दबदबा कमजोर पड़ सकता है।
OPEC की कमाई में गिरावट
- OPEC के आंकड़े बताते हैं
- 2022: 746 अरब डॉलर
- 2023: 605 अरब डॉलर
- 2024: 550 अरब डॉलर
- 2025: ~455 अरब डॉलर (अनुमान)
इसका मतलब है कि तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ रही है।
भारत और दुनिया के लिए क्या खतरा?
- भारत मेंतेल महंगा हो सकता है
- महंगाई बढ़ सकती है
- सप्लाई बाधित हो सकती है
भारत की ओर से स्थिति को संभालने के लिए उच्च स्तर पर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में तनाव बढ़ता है या आवाजाही बाधित होती है, तो इससे वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतों में तेजी आ सकती है। भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए यह स्थिति आर्थिक दबाव बढ़ा सकती है। फिलहाल सरकार ने साफ किया है कि युआन में भुगतान से जुड़ी खबरों में कोई सच्चाई नहीं है और भारत अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है।
दुनिया के लिए प्रभाव
- ऊर्जा संकट गहरा सकता है
- डॉलर बनाम युआन की आर्थिक जंग तेज होगी
- वैश्विक व्यापार अस्थिर हो सकता है