Edited By Ramanjot,Updated: 22 Jan, 2026 10:19 PM

महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा सियासी संकेत मिलने जा रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को मुंबई में एक साझा मंच से पार्टी...
नेशनल डेस्क: महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़ा सियासी संकेत मिलने जा रहा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे शुक्रवार, 23 जनवरी 2026 को मुंबई में एक साझा मंच से पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की 100वीं जयंती की शुरुआत के अवसर पर आयोजित किया जा रहा है।
यह पहला मौका होगा जब हाल ही में हुए बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव के बाद दोनों ठाकरे नेता एक साथ सार्वजनिक मंच पर नजर आएंगे। BMC चुनाव में शिवसेना (UBT) को 65 सीटें और मनसे को 6 सीटें मिली थीं, जबकि भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की महायुति ने बहुमत हासिल किया था। इसके बावजूद उद्धव-राज ठाकरे के बीच बने ‘शिव शक्ति’ गठबंधन को मराठी राजनीति में अहम माना जा रहा है।
कार्यक्रम का आयोजन स्थल
संयुक्त संबोधन का आयोजन मुंबई के सायन स्थित षणमुखानंद हॉल में किया गया है। इस कार्यक्रम में शिवसेना (UBT) और मनसे के कार्यकर्ताओं के अलावा अन्य राजनीतिक दलों के समर्थकों की भी बड़ी संख्या में मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है। माना जा रहा है कि मंच से मराठी अस्मिता, स्थानीय निकाय चुनावों और आने वाले राजनीतिक रोडमैप को लेकर अहम संदेश दिया जा सकता है।
गठबंधन पर उठते सवाल
हालांकि इस एकजुटता पर सवाल भी खड़े हो गए हैं। कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) में मनसे के कुछ नगरसेवकों द्वारा शिंदे-नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन दिए जाने से ‘शिव शक्ति’ गठबंधन की मजबूती पर बहस तेज हो गई है। इस घटनाक्रम से उद्धव ठाकरे गुट में नाराजगी देखी जा रही है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या संयुक्त मंच से इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट राजनीतिक संकेत दिया जाएगा।
BJP का तीखा हमला
भाजपा ने इस घटनाक्रम को लेकर उद्धव ठाकरे पर सीधा हमला बोला है। भाजपा नेताओं का कहना है कि 2019 में देवेंद्र फडणवीस के साथ किए गए राजनीतिक फैसलों का असर अब सामने आ रहा है। भाजपा मीडिया प्रभारियों ने दावा किया कि गठबंधन के बावजूद मनसे की नगरसेवकों की संख्या में गिरावट आई है और आने वाले दिनों में ऐसे फैसले अन्य नगर निगमों में भी देखने को मिल सकते हैं। भाजपा का दावा है कि जनता विकास के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व को तरजीह दे रही है।