होटलों या अस्पतालों में आधार कार्ड की फोटोकॉपी का झंझट खत्म... UIDAI का नया सिस्टम लागू

Edited By Updated: 06 Nov, 2026 07:59 AM

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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने अपनी सहमति-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन प्रणाली का दायरा बढ़ाते हुए इसे प्रमुख उपभोक्ता सेवाओं तक पहुंचा दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब होटल चेक-इन या गिग वर्कर की पहचान वेरिफिकेशन करने के लिए आधार कार्ड की...

नई दिल्ली:  भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने अपनी सहमति-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन प्रणाली का दायरा बढ़ाते हुए इसे प्रमुख उपभोक्ता सेवाओं तक पहुंचा दिया है। इस नई व्यवस्था के तहत अब होटल चेक-इन या गिग वर्कर की पहचान वेरिफिकेशन करने के लिए आधार कार्ड की कागजी फोटोकॉपी जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। प्राइवेसी को मजबूत करने और कागजी दस्तावेजों के दुरुपयोग को रोकने के लिए जनवरी से अब तक 300 से अधिक नए संगठनों को इस व्यवस्था से जोड़ा जा चुका है।

ऑफलाइन वेरिफिकेशन संस्थाओं (OVSEs) का बढ़ता दायरा
डिजिटल पहचान सत्यापन को अपनाने वाली इन 300 'ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटीज' (OVSEs) में विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख संस्थाएं शामिल हैं:

हॉस्पिटैलिटी और ट्रैवल: होटल चेक-इन, प्रवेश द्वारों और यात्रा वेरिफिकेशन प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और तेज बनाना।
हेल्थकेयर और शिक्षा: अस्पतालों में मरीजों के प्रवेश और शिक्षण संस्थानों में दाखिले के दौरान पहचान की आसान और सुरक्षित जांच।
गिग इकॉनमी व उपभोक्ता सेवाएं: प्लेटफॉर्म वर्करों, डिलीवरी एजेंट्स, सर्विस प्रोवाइडर्स और इवेंट स्टाफ की ऑनबोर्डिंग और बैकग्राउंड वेरिफिकेशन को गति देना।

कैसे काम करती है यह सहमति-आधारित प्रक्रिया?
स्मार्टफोन और आधार ऐप के जरिए चलने वाला यह सिस्टम यूजर्स को अपनी डेटा शेयरिंग पर पूरा नियंत्रण देता है:

-यूजर की स्पष्ट अनुमति के बाद ही जानकारी साझा होती है। इसके अलावा यूजर यह तय कर सकते हैं कि उन्हें पूरी जानकारी साझा करनी है या सिर्फ कुछ जरूरी डेटा।

-वेरिफिकेशन करने वाली संस्था को व्यक्ति का 12-अंकों का मूल आधार नंबर कभी दिखाई नहीं देता। वेरिफिकेशन की पूरी प्रक्रिया ऑफलाइन मोड में होती है, जिससे संस्थाओं को UIDAI के केंद्रीय सर्वर या डेटाबेस का एक्सेस नहीं मिलता।

DPDP एक्ट और प्राइवेसी सुरक्षा के अनुकूल
UIDAI के अनुसार, यह नया ढांचा भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) कानून के मानकों के पूरी तरह अनुरूप है। यह प्रणाली यूजर की सहमति, सीमित डेटा संग्रह और स्मार्टफोन-आधारित सुरक्षित पहचान सत्यापन को प्राथमिकता देती है। 

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