US की नई सख्त वीज़ा पॉलिसी लागू: भारतीयों पर सबसे ज्यादा गिरी गाज, वीज़ा क्लियरेंस हुआ मुश्किल

Edited By Updated: 08 Dec, 2025 06:16 AM

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अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने विदेश से आने वाले प्रोफेशनल्स के लिए वीज़ा प्रक्रिया को एक बार फिर सख्त बना दिया है। नई नीति के तहत वॉशिंगटन ने अपने सभी दूतावासों को स्पष्ट निर्देश भेजे हैं कि कुछ विशेष डिजिटल सेक्टर्स में काम कर चुके लोगों की आवेदन...

नेशनल डेस्क: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन ने विदेश से आने वाले प्रोफेशनल्स के लिए वीज़ा प्रक्रिया को एक बार फिर सख्त बना दिया है। नई नीति के तहत वॉशिंगटन ने अपने सभी दूतावासों को स्पष्ट निर्देश भेजे हैं कि कुछ विशेष डिजिटल सेक्टर्स में काम कर चुके लोगों की आवेदन प्रक्रिया अब पहले से कहीं ज्यादा कठोर जांच के साथ की जाए। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक यह निर्देश अमेरिकी विदेश विभाग के एक आंतरिक मेमो के आधार पर जारी किए गए हैं।

किन लोगों पर होगी कड़ी जांच?

2 दिसंबर को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि दूतावास अधिकारी उन सभी आवेदकों की प्रोफाइल गहराई से जांचें—खासकर उनका रेज़्यूमे और लिंक्डइन—जो अमेरिका आने के लिए किसी भी तरह का वीज़ा आवेदन जमा कर रहे हैं। ध्यान विशेष रूप से उन उम्मीदवारों पर रहेगा जिन्होंने:

की जिम्मेदारियाँ निभाई हों।

इतना ही नहीं, निर्देश यह भी कहते हैं कि आवेदक के परिवार के सदस्यों के पेशे और अनुभव की भी समीक्षा की जाए ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इन क्षेत्रों से जुड़ा कोई व्यक्ति वीज़ा प्रक्रिया में शामिल न हो जाए।

कौन-कौन सी वीज़ा कैटेगरी प्रभावित होंगी?

नई नीति सभी वीज़ा श्रेणियों पर लागू है—चाहे वह:

  • पत्रकार,

  • पर्यटक, या

  • विशेषज्ञ पेशेवरों

से जुड़ी हों।

लेकिन इसका सबसे बड़ा असर H-1B वीज़ा पर पड़ेगा, क्योंकि यह श्रेणी टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और अन्य हाई-स्किल्ड क्षेत्रों में काम करने वाले विदेशी विशेषज्ञों के लिए सबसे प्रमुख मार्ग है। इस कैटेगरी में भारतीयों का दबदबा लंबे समय से बना हुआ है।

भारतीय प्रोफेशनल्स पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

US सिटिज़नशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज़ (USCIS) ने जो आँकड़े जारी किए थे, उनके अनुसार 2024 में दिए गए कुल H-1B वीज़ा में से लगभग 70% भारतीय नागरिकों को मिले थे।
भारतीय मूल के प्रोफेशनल्स:

  • अमेरिकी टेक उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं,

  • हेल्थ सेक्टर में भी उनकी उपस्थिति मजबूत है—अमेरिका में कार्यरत डॉक्टरों में लगभग 6 फीसदी भारतीय हैं,

  • और Google, Microsoft, IBM जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों में नेतृत्व स्तर पर भी उनकी मजबूत भागीदारी है।

IT, सॉफ्टवेयर और डेटा आधारित नौकरियों में भारतीयों की भारी मांग को देखते हुए, नई कठोर नीति भारतीय आवेदकों के लिए वीज़ा प्रक्रिया को पहले से अधिक जटिल बना सकती है—विशेषकर उन लोगों के लिए जिनकी प्रोफाइल ऑनलाइन कंटेंट मॉनिटरिंग या डिजिटल सेफ्टी जैसी भूमिकाओं से जुड़ी रही है।

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