Edited By Mansa Devi,Updated: 14 Mar, 2026 12:12 PM

वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। सुरक्षा चिंताओं और परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के कारण खाड़ी देशों के साथ व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका असर खासतौर पर तेल-गैस सप्लाई और कृषि उत्पादों के निर्यात...
नेशनल डेस्क: वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब भारत के व्यापार पर भी दिखाई देने लगा है। सुरक्षा चिंताओं और परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के कारण खाड़ी देशों के साथ व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। इसका असर खासतौर पर तेल-गैस सप्लाई और कृषि उत्पादों के निर्यात पर पड़ा है। चावल सहित कई एग्री प्रोडक्ट्स के साथ-साथ अंडों का निर्यात भी प्रभावित हुआ है।
अंडों की कीमतों में आई बड़ी गिरावट
खाड़ी देशों को अंडों का निर्यात रुकने के कारण भारत के घरेलू बाजार में अंडों की आपूर्ति बढ़ गई है। इसकी वजह से कीमतों में अचानक गिरावट देखने को मिल रही है। उदाहरण के तौर पर बेंगलुरु में थोक बाजार में अंडों की कीमत लगभग 7 रुपये प्रति अंडे से घटकर करीब 5 रुपये प्रति अंडा रह गई है। थोक खरीदार अब लगभग 500 रुपये में 100 अंडे खरीद पा रहे हैं। वहीं खुदरा बाजार में भी अंडों की कीमत 5.50 से 6 रुपये प्रति अंडा हो गई है, जबकि पहले यह 8 से 9 रुपये तक बिकते थे।
इन देशों के साथ व्यापार में आई रुकावट
सुरक्षा और परिवहन से जुड़ी समस्याओं के कारण संयुक्त अरब अमीरात, ओमान, कतर और बहरीन जैसे देशों के साथ व्यापार प्रभावित हुआ है। इन देशों में अंडों की सप्लाई कम हो गई है। इसके चलते भारत में अंडों की अधिकता हो गई है। जहां उपभोक्ताओं को कम कीमत पर अंडे मिल रहे हैं, वहीं मुर्गी पालन करने वाले किसानों और व्यापारियों के सामने आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं।
हर दिन करोड़ों अंडों का होता था निर्यात
उद्योग से जुड़े लोगों के मुताबिक संकट से पहले भारत से खाड़ी देशों को हर दिन करीब एक करोड़ अंडे निर्यात किए जाते थे। लेकिन हालात बिगड़ने के बाद निर्यात के लिए तैयार अंडों को अब घरेलू बाजार में ही बेचा जा रहा है। इससे बाजार में अंडों की सप्लाई अचानक बढ़ गई है। बताया जाता है कि भारत में तैयार होने वाले अंडों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों में भेजा जाता रहा है।
रमजान और परिवहन बाधाओं का भी असर
निर्यात में आई गिरावट के पीछे परिवहन व्यवस्था में आई दिक्कतों के साथ-साथ रमजान के दौरान खाद्य पदार्थों की मांग में आए बदलाव को भी कारण माना जा रहा है। मांग कम होने और निर्यात ठप होने से बाजार में अंडों का अतिरिक्त स्टॉक जमा हो गया, जिससे कीमतों में तेजी से गिरावट आई है।
कम कीमत से बढ़ी घरेलू मांग
कीमतों में गिरावट का असर अब उपभोक्ताओं की मांग पर भी दिखाई दे रहा है। पहले महंगे होने के कारण कई लोग अंडों का सेवन कम कर रहे थे, लेकिन अब सस्ती कीमतों की वजह से उनकी खपत बढ़ रही है। अंडे को प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जाता है और यह आम लोगों के लिए सुलभ भोजन बनता जा रहा है।
पोषण के लिए भी फायदेमंद
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लगभग 100 ग्राम अंडे में करीब 155 कैलोरी और 12.6 ग्राम प्रोटीन होता है। यही कारण है कि इसे संतुलित आहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। कीमत कम होने से अब अधिक परिवार अपने भोजन में अंडों को शामिल कर पा रहे हैं।