107 लोगों की मौत का जिम्मेदार SIR? सुसाइड नोट में खुलासा, पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्ताव हुआ पास

Edited By Updated: 05 Feb, 2026 02:59 PM

west bengal assembly resolution on 107 deaths due to sir 2026

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। इस बार विवाद का केंद्र बना है SIR । ममता सरकार ने बुधवार, 4 फरवरी 2026 को विधानसभा में एक सनसनीखेज प्रस्ताव पेश कर दावा किया है कि इस प्रक्रिया की वजह से राज्य में अब तक 107 लोगों की जान जा चुकी...

नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। इस बार विवाद का केंद्र बना है SIR । ममता सरकार ने बुधवार, 4 फरवरी 2026 को विधानसभा में एक सनसनीखेज प्रस्ताव पेश कर दावा किया है कि इस प्रक्रिया की वजह से राज्य में अब तक 107 लोगों की जान जा चुकी है। राज्य सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को 'मौत का फरमान' करार देते हुए EC पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

विधानसभा में पेश हुआ निंदा प्रस्ताव

संसदीय कार्य मंत्री शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने नियम 169 के तहत सदन में यह प्रस्ताव पेश किया। सरकार का आरोप है कि SIR के नाम पर मतदाताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है।

इन बातों का किया गया दावा

मंत्री ने दावा किया कि मतदाता सूची से नाम कटने के डर और वेरिफिकेशन की जटिल प्रक्रिया के कारण 107 लोगों की मृत्यु हुई है। प्रस्ताव में कहा गया है कि सूची से बाहर होने के खौफ में कई लोगों ने आत्महत्या जैसा आत्मघाती कदम भी उठाया। आरोप है कि नोटिस मिलने के बाद बुजुर्गों और बीमार लोगों को सुनवाई केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी सेहत बिगड़ रही है।

क्या है ये SIR विवाद?

निर्वाचन आयोग आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह 'साफ' करने के लिए SIR प्रक्रिया चला रहा है। इसके तहत उन वोटरों की पहचान की जा रही है जिनका डेटा साल 2002 की पुरानी सूची से मेल नहीं खाता। TMC का आरोप है कि यह प्रक्रिया जानबूझकर सिर्फ बंगाल में की जा रही है और इसके जरिए गरीब, महिलाओं और प्रवासियों के नाम काटे जा रहे हैं। वहीं, सीएम ममता बनर्जी ने भी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले को उठाते हुए इसे 'लोकतंत्र के खिलाफ साजिश' बताया है।

 

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