Edited By Mehak,Updated: 17 Feb, 2026 04:33 PM

एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि दिल की धड़कन बंद होने के बाद भी कुछ समय तक दिमाग सक्रिय रह सकता है शोध में पाया गया कि सीपीआर के दौरान कई मरीजों में ब्रेन वेव्स दर्ज हुईं और करीब 40 प्रतिशत लोगों ने किसी न किसी स्तर पर जागरूकता महसूस...
नेशनल डेस्क : अब तक आम धारणा यही रही है कि जैसे ही दिल की धड़कन बंद होती है, व्यक्ति की चेतना भी समाप्त हो जाती है। लेकिन एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने इस सोच पर सवाल खड़े किए हैं। शोध के अनुसार, दिल रुकने के बाद भी कुछ समय तक दिमाग सक्रिय रह सकता है और व्यक्ति को अपने आसपास की हलचल का एहसास हो सकता है।
क्या कहता है अध्ययन?
यह अध्ययन मेडिकल जर्नल Resuscitation में प्रकाशित हुआ है। इसमें बताया गया कि जिन मरीजों का दिल धड़कना बंद हो गया था और जिन्हें क्लिनिकली मृत माना गया, उनमें से कुछ में सीपीआर (CPR) के दौरान दिमागी गतिविधि दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ मामलों में दिल रुकने के 35 से 60 मिनट बाद तक EEG (Electroencephalogram) में गामा, डेल्टा, थीटा, अल्फा और बीटा जैसी ब्रेन वेव्स के संकेत मिले। ये तरंगें सामान्य रूप से सोचने, याद रखने और जागरूकता से जुड़ी मानी जाती हैं।
किसने किया यह शोध?
इस रिसर्च का नेतृत्व न्यूयॉर्क स्थित NYU Langone Medical Center के डॉक्टर Sam Parnia ने किया। उनकी टीम ने अमेरिका और ब्रिटेन के 25 अस्पतालों में कार्डियक अरेस्ट से बचे 53 मरीजों पर अध्ययन किया। डॉ. पर्निया के अनुसार, पहले माना जाता था कि दिल रुकने के करीब 10 मिनट बाद दिमाग को स्थायी नुकसान हो जाता है। लेकिन इस शोध में पाया गया कि CPR के दौरान दिमाग में इलेक्ट्रिकल गतिविधि फिर से दिखाई दे सकती है, जो किसी स्तर पर चेतना का संकेत देती है।
40% लोगों ने बताई जागरूकता
अध्ययन में शामिल लगभग 40 प्रतिशत लोगों ने बताया कि उन्हें दिल रुकने के दौरान भी किसी न किसी रूप में जागरूकता महसूस हुई। कुछ प्रतिभागियों ने कहा कि उन्हें ऐसा लगा जैसे वे अपने शरीर से अलग होकर आसपास हो रही गतिविधियों को देख या समझ रहे हों। शोधकर्ताओं का कहना है कि ये अनुभव सामान्य सपनों या भ्रम से अलग थे, हालांकि इस विषय पर अभी और गहन अध्ययन की आवश्यकता है।
क्या बदल सकती है हमारी समझ?
यह अध्ययन जीवन और मृत्यु को लेकर हमारी पारंपरिक सोच को चुनौती देता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शुरुआती निष्कर्ष हैं और इस दिशा में और शोध की जरूरत है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि दिल रुकने के बाद दिमाग तुरंत पूरी तरह निष्क्रिय हो जाए, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं हो सकती। यह खोज चिकित्सा विज्ञान और पुनर्जीवन तकनीकों के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल सकती है।