Edited By Mansa Devi,Updated: 04 Feb, 2026 05:38 PM

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पूरी नींद लेना ज्यादातर लोगों के लिए एक चुनौती बन चुका है। काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां, लंबा सफर और देर रात तक मोबाइल या टीवी देखना इन सबके बीच नींद अक्सर सबसे पहले कुर्बान होती है।
नेशनल डेस्क: आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में पूरी नींद लेना ज्यादातर लोगों के लिए एक चुनौती बन चुका है। काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां, लंबा सफर और देर रात तक मोबाइल या टीवी देखना इन सबके बीच नींद अक्सर सबसे पहले कुर्बान होती है। लोग जानते हैं कि उन्हें जल्दी सोना चाहिए, लेकिन दिन का वही वक्त जब थोड़ी राहत मिलती है, देर रात तक खिंच जाता है। नतीजा यह होता है कि नींद पूरी नहीं हो पाती और सुबह अलार्म के साथ एक और थका हुआ दिन शुरू हो जाता है।
वीकेंड पर ज्यादा सोना क्यों लगता है जरूरी?
पूरे हफ्ते नींद की कमी झेलने के बाद जब शुक्रवार आता है, तो शरीर और दिमाग दोनों जवाब दे चुके होते हैं। ऐसे में शनिवार और रविवार को देर तक सोना बेहद सुकून भरा लगता है। ऐसा लगता है जैसे शरीर अपनी अधूरी नींद की भरपाई कर रहा हो। नींद सिर्फ आराम का जरिया नहीं है, बल्कि यही वह समय होता है जब शरीर और दिमाग खुद की मरम्मत करते हैं। इसलिए कई लोग मानते हैं कि वीकेंड की लंबी नींद हफ्ते भर की कमी पूरी कर देती है।
लेकिन क्या सच में ऐसा होता है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वीकेंड पर ज्यादा सो लेने से थोड़ी राहत तो मिल सकती है, लेकिन यह लंबे समय से चली आ रही नींद की कमी को पूरी तरह ठीक नहीं कर पाती। विशेषज्ञ बताते हैं कि नींद की कमी शरीर के हार्मोन संतुलन, मेटाबॉलिज्म और दिमागी कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। इन बदलावों को सिर्फ एक या दो दिन ज्यादा सोकर सामान्य नहीं किया जा सकता।
नींद की कमी शरीर को कैसे नुकसान पहुंचाती है?
जब कोई व्यक्ति हफ्तों या महीनों तक कम सोता है, तो शरीर लगातार तनाव की स्थिति में रहता है। इसके कारण:
- तनाव से जुड़े हार्मोन बढ़ जाते हैं
- रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने लगती है
- ब्लड शुगर कंट्रोल बिगड़ सकता है
- ध्यान और याददाश्त पर असर पड़ता है
- मूड और भावनाओं पर नियंत्रण कम हो जाता है
सही समाधान क्या है?
डॉक्टरों और स्लीप एक्सपर्ट्स के अनुसार, असली समाधान वीकेंड पर देर तक सोना नहीं, बल्कि रोज़ नियमित और पूरी नींद लेना है।
- इसके लिए कुछ आसान आदतें मदद कर सकती हैं:
- हर दिन लगभग एक ही समय पर सोना और जागना
- सोने से पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल कम करना
- सोने से पहले 15–30 मिनट का शांत रूटीन अपनाना
- बेडरूम को शांत और आरामदायक बनाना