Edited By Mansa Devi,Updated: 12 Mar, 2026 04:11 PM

अगर आप ट्रैफिक ई-चालान की पेंडिंग राशि या पुराने चालान से परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। साल 2026 की पहली लोक अदालत 14 मार्च को आयोजित होने जा रही है।
नेशनल डेस्क: अगर आप ट्रैफिक ई-चालान की पेंडिंग राशि या पुराने चालान से परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। साल 2026 की पहली लोक अदालत 14 मार्च को आयोजित होने जा रही है। इस दिन आम लोगों को अपने पुराने या लंबित ट्रैफिक चालान को कम करवाने या कुछ मामलों में पूरी तरह माफ करवाने का मौका मिलेगा। छोटे ट्रैफिक नियम तोड़ने पर चालान कट जाता है, लेकिन कई बार लोग उसे समय पर जमा नहीं कर पाते और वह लंबित रह जाता है। ऐसे मामलों में लोक अदालत एक तेज और आसान समाधान के रूप में सामने आती है।
लोक अदालत क्या होती है?
लोक अदालत का उद्देश्य अदालतों में पड़े पुराने और छोटे मामलों का जल्दी और आसान तरीके से निपटारा करना है। यह व्यवस्था कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 के तहत चलाई जाती है। लोक अदालत में फैसला दोनों पक्षों की सहमति से लिया जाता है और इसका परिणाम सामान्य अदालत के निर्णय जितना ही वैध माना जाता है। खासकर ट्रैफिक चालान जैसे मामूली मामलों में यह तरीका बेहद उपयोगी है क्योंकि इसमें लंबी कानूनी प्रक्रिया नहीं होती।
किन ट्रैफिक मामलों का निपटारा किया जाता है?
लोक अदालत में आमतौर पर छोटे ट्रैफिक नियम उल्लंघन से जुड़े मामलों की सुनवाई की जाती है। ऐसे मामलों में बिना हेलमेट बाइक चलाना, सीट बेल्ट न लगाना, रेड लाइट पार करना या गलत जगह वाहन खड़ा करना शामिल होता है। इसके अलावा स्पीड लिमिट से ज्यादा तेज गाड़ी चलाना, पीयूसी सर्टिफिकेट न होना, ड्राइविंग लाइसेंस साथ न रखना और गलत लेन में वाहन चलाना जैसे मामलों का भी यहां निपटारा किया जा सकता है। इन मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया की जरूरत नहीं होती और समझौते के आधार पर जल्दी फैसला हो जाता है, जिससे लोगों को पेंडिंग चालान से राहत मिल सकती है।
किन मामलों की लोक अदालत में सुनवाई नहीं होती?
लोक अदालत में केवल वही मामले लिए जाते हैं जिनमें समझौता संभव हो। कुछ गंभीर ट्रैफिक अपराध ऐसे होते हैं जिनकी सुनवाई यहां नहीं की जाती। उदाहरण के लिए नशे में वाहन चलाना, हिट एंड रन के मामले, लापरवाही से गाड़ी चलाने के कारण किसी व्यक्ति की मौत होना या नाबालिग द्वारा वाहन चलाना जैसे मामलों का निपटारा लोक अदालत में नहीं होता। इसके अलावा अगर किसी वाहन का इस्तेमाल किसी आपराधिक गतिविधि में हुआ है या मामला पहले से किसी दूसरी अदालत में चल रहा है, तो ऐसे मामलों की सुनवाई भी लोक अदालत में नहीं की जाती।
ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन आवश्यक, टोकन नंबर के बिना नहीं होगी सुनवाई
लोक अदालत में चालान निपटाने के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। इसके लिए आवेदकों को राज्य ट्रैफिक पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। यहां लोक अदालत आवेदन विकल्प चुनकर फॉर्म भरना होगा और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे। आवेदन पूरा होने के बाद आवेदक को टोकन नंबर ई-मेल या मोबाइल पर भेजा जाएगा। टोकन नंबर के बिना सुनवाई नहीं होगी।
लोक अदालत में कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?
लोक अदालत में जाते समय कुछ जरूरी दस्तावेज साथ रखना अनिवार्य है। इनमें शामिल हैं:
- ट्रैफिक चालान की कॉपी
- वाहन का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC)
- ड्राइविंग लाइसेंस
- पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी
- अदालत से मिले नोटिस या समन की कॉपी (यदि कोई मिला हो)
- चालान का कोई भुगतान पहले किया गया हो तो उसकी रसीद