Edited By Rohini Oberoi,Updated: 05 Jan, 2026 12:00 PM

फूड डिलीवरी दिग्गज जोमैटो (Zomato) के फाउंडर और सीईओ दीपिंदर गोयल ने हाल ही में कंपनी के वर्क कल्चर और 'गिग इकोनॉमी' को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एक पॉडकास्ट में बात करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी हर महीने लगभग 5000 गिग वर्कर्स (डिलीवरी...
Zomato: फूड डिलीवरी दिग्गज जोमैटो (Zomato) के फाउंडर और सीईओ दीपिंदर गोयल ने हाल ही में कंपनी के वर्क कल्चर और 'गिग इकोनॉमी' को लेकर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एक पॉडकास्ट में बात करते हुए उन्होंने बताया कि कंपनी हर महीने लगभग 5000 गिग वर्कर्स (डिलीवरी पार्टनर्स) को काम से निकाल देती है लेकिन इससे भी बड़ा आंकड़ा खुद नौकरी छोड़ने वालों का है।
नौकरी छोड़ने और नई भर्ती का चक्र
दीपिंदर गोयल के अनुसार जोमैटो में कर्मचारियों का आना-जाना बहुत तेज गति से होता है। हर महीने लगभग 1.5 लाख से 2 लाख डिलीवरी पार्टनर्स अपनी मर्जी से काम छोड़ देते हैं। जितने लोग छोड़ते हैं कंपनी हर महीने उतने ही यानी लगभग 1.5 से 2 लाख नए लोगों को काम पर रखती भी है। जो 5000 लोग निकाले जाते हैं, उनके पीछे मुख्य कारण धोखाधड़ी (Fraud) होता है। जैसे खाने की डिलीवरी न करना लेकिन ऐप पर डिलीवर दिखा देना या कैश-ऑन-डिलीवरी ऑर्डर में ग्राहकों को बचा हुआ पैसा (Change) वापस न करना।

लोग नौकरी क्यों छोड़ देते हैं?
सीईओ ने बताया कि लोग इस काम को 'टेंपरेरी' (अस्थायी) विकल्प के रूप में देखते हैं। कई लोग तब जुड़ते हैं जब उन्हें अचानक पैसों की सख्त जरूरत होती है। जैसे ही उनकी जरूरत पूरी होती है वे काम छोड़ देते हैं।डिलीवरी पार्टनर्स के पास लॉग-इन और लॉग-आउट करने का अपना समय चुनने की आजादी होती है, इसलिए वे इसे परमानेंट करियर की तरह नहीं देखते।
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एटर्नल (Eternal): जोमैटो का बड़ा साम्राज्य
जोमैटो की पैरेंट कंपनी का नाम अब एटर्नल (Eternal) है। दीपिंदर गोयल ने कंपनी के विभिन्न बिजनेस वर्टिकल्स के बारे में भी जानकारी दी:
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ब्लिंकिट (Blinkit): यह क्विक कॉमर्स यूनिट अब फूड डिलीवरी से भी आगे निकल गई है।
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हाइपरप्योर (Hyperpure): यह होटलों और रेस्टोरेंट्स को राशन सप्लाई करने वाला B2B बिजनेस है।
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डिस्ट्रिक्ट (District): यह कंपनी का नया 'गोइंग आउट' बिजनेस वर्टिकल है।
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जोमैटो: यह अभी भी कंपनी के लिए सबसे ज्यादा मुनाफा (Profit) कमाने वाला इंजन है।

गिग वर्कर्स को सुविधाएं क्यों नहीं?
अक्सर यह मांग उठती है कि डिलीवरी पार्टनर्स को फुल-टाइम कर्मचारियों की तरह PF (प्रोविडेंट फंड) या गारंटीड सैलरी मिलनी चाहिए। इस पर गोयल ने स्पष्ट किया। गिग वर्कर्स का मॉडल 'फिक्स्ड शिफ्ट' पर काम नहीं करता। उन्हें कोई लोकेशन या समय अलॉट नहीं किया जाता। वे खुद तय करते हैं कि उन्हें शहर के किस हिस्से में और कितनी देर काम करना है। इसी स्वतंत्रता के कारण उन्हें पारंपरिक कॉर्पोरेट सुविधाएं देना इस बिजनेस मॉडल के हिसाब से संभव नहीं है।