सरकारी बैंकों का जलवा, 6 महीने में 5.75 लाख करोड़ बढ़ा मार्केट कैप

Edited By Updated: 20 Feb, 2026 05:04 PM

public sector banks shine market cap rises in 6 months

सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले छह महीनों में देश के 12 पब्लिक सेक्टर बैंकों का कुल मार्केट कैप 5.75 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 21.35 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इस दौरान Nifty PSU Bank Index में करीब 34% की तेजी दर्ज...

बिजनेस डेस्कः सरकारी बैंकों के शेयरों में तेजी का सिलसिला लगातार जारी है। पिछले छह महीनों में देश के 12 पब्लिक सेक्टर बैंकों का कुल मार्केट कैप 5.75 लाख करोड़ रुपए बढ़कर 21.35 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया है। इस दौरान Nifty PSU Bank Index में करीब 34% की तेजी दर्ज की गई, जबकि Nifty Private Bank Index ने सिर्फ 7% का रिटर्न दिया। क्रेडिट ग्रोथ में सुधार, एनपीए में कमी और रिकॉर्ड मुनाफे ने सरकारी बैंकों के शेयरों को मजबूती दी है।

किन बैंकों ने मचाया धमाल?

पिछले छह महीनों में सबसे ज्यादा तेजी Bank of India में रही, जिसका शेयर करीब 50% चढ़ा। देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) के शेयर में 47% की तेजी आई। वहीं Union Bank of India में 42% की बढ़त दर्ज की गई। इसके अलावा Canara Bank, Indian Bank, Bank of Maharashtra, Bank of Baroda और Punjab National Bank के शेयरों में 20% से 39% तक की तेजी देखी गई।

तेजी के पीछे क्या है वजह?

सरकारी बैंकों की रैली के पीछे सबसे बड़ा कारण उनकी मजबूत क्रेडिट ग्रोथ है। तीसरी तिमाही में सरकारी बैंकों की लोन ग्रोथ सालाना आधार पर 14.5% से ज्यादा रही। इसमें सबसे ज्यादा मांग एसएमई और रिटेल लेंडिंग से आई। इसके मुकाबले प्राइवेट बैंकों की लोन ग्रोथ 12% से कम रही। तिमाही आधार पर भी सरकारी बैंकों की लोन ग्रोथ 5.5% रही, जबकि प्राइवेट बैंकों में यह 3.5% तक सीमित रही।

आगे क्या?

State Bank of India ने अपनी क्रेडिट ग्रोथ गाइडेंस बढ़ाकर 13–15% कर दी है। Bank of Maharashtra ने 20%, UCO Bank ने 16.74% और Indian Overseas Bank ने 24.13% की ग्रोथ गाइडेंस दी है। Geojit Investments में रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, पिछले दो तिमाहियों में सरकारी बैंकों ने क्रेडिट ग्रोथ के मामले में प्राइवेट बैंकों को पीछे छोड़ा है। अधिकांश पीएसयू बैंकों ने 2026 और 2027 के लिए अपने अनुमान बढ़ाए हैं। पर्याप्त कैपिटल बफर और मजबूत क्रेडिट-टू-डिपॉजिट रेश्यो इस ग्रोथ को सपोर्ट दे रहे हैं।

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