Edited By Kamini,Updated: 10 Jan, 2026 07:31 PM

कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है।
पंजाब डेस्क: कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैहरा की जमानत रद्द करने की मांग को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई है। हाईकोर्ट ने सरकार से सीधे सवाल किया कि जब जमानत 2 साल पहले दी जा चुकी है, तो अब अचानक इसे रद्द कराने की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है और इसके पीछे क्या कोई नई स्थिति या तथ्य सामने आए हैं।
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार की याचिका पर हैरानी जताते हुए कहा कि इतने लंबे अंतराल के बाद जमानत रद्द करने की मांग करना समझ से परे है। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई नया आधार मौजूद है तो उसे रिकॉर्ड पर लाया जाए। सरकार की ओर से संतोषजनक जवाब न मिलने पर कोर्ट ने अगली सुनवाई 30 जनवरी तय करते हुए इसे सरकार के लिए अंतिम मौका बताया है।
कोर्ट की टिप्पणी पर सरकारी पक्ष कोई ठोस तर्क पेश नहीं कर सका, जिसके बाद अतिरिक्त समय की मांग की गई। कोर्ट ने सुनवाई टालने की अनुमति तो दे दी, लेकिन यह भी साफ कर दिया कि आगे किसी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। उल्लेखनीय है कि इस मामले में इससे पहले 3 दिसंबर को भी सुनवाई हुई थी, तब भी राज्य सरकार ने तैयारी पूरी न होने का हवाला देकर समय मांगा था। इसके बावजूद अब तक कोई नया तथ्य या ठोस कारण अदालत के सामने नहीं रखा गया है, जिस पर हाईकोर्ट ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
पूरा मामला:
मामला एक पुराने एनडीपीएस केस से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसकी एफआईआर वर्ष 2015 में दर्ज हुई थी। इसी केस से संबंधित आरोपों के आधार पर 4 जनवरी 2024 को कपूरथला जिले के सुभानपुर थाने में एक नई एफआईआर दर्ज की गई थी। उस समय सुखपाल सिंह खैहरा पहले से ही न्यायिक हिरासत में थे। इसके बावजूद उन्हें 15 जनवरी 2024 को इस मामले में जमानत मिल गई थी। अब जमानत मिलने के लगभग 2 साल बाद राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर जमानत रद्द करने की मांग की है, जिस पर अदालत ने गंभीर सवाल उठाते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है।
अपने शहर की खबरें Whatsapp पर पढ़ने के लिए Click Here