संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता पाने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी: भारत

Edited By PTI News Agency, Updated: 17 Sep, 2020 08:20 PM

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नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को परिलक्षित करने वाली विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने को ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ दी है।

नयी दिल्ली, 17 सितंबर (भाषा) भारत ने बृहस्पतिवार को कहा कि उसने समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को परिलक्षित करने वाली विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में स्थायी सदस्यता प्राप्त करने को ‘‘सर्वोच्च प्राथमिकता’’ दी है।

विदेश मंत्रालय में राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों पर चल रही अंतर सरकारी चर्चा से सक्रिय रुप से जुड़ा है और समान विचार वाले देशों के साथ इस संबंध में काम कर रहा है।

मुरलीधरन राज्यसभा में जवाब दे रहे थे। उनसे पूछा गया था कि क्या सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट अर्जित करने के लिए गंभीर प्रयास किए हैं।

जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘सरकार ने समकालीन वैश्विक वास्तविकताओं को परिलक्षित करने वाली विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, में भारत के लिए स्थाई सदस्यता प्राप्त करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘भारत सुधारोन्मुख देशों के सहयोग से सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तार करने के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों के बीच सहयोग स्थापित करने के लिए लगातार प्रयास करता रहा है।’’
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी और 10 अस्थायी सदस्य देश हैं जिनका निर्वाचन संयुक्त राष्ट्र की महासभा दो सालों के कार्यकाल के लिए करती है। रूस, ब्रिटेन, चीन, फ्रांस और अमेरिका वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य हैं और ये किसी भी संकल्प को पारित होने में अड़ंगा लगा सकते हैं। स्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ाए जाने की लंबे समय से मांग की जा रही है।

भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, जर्मनी और जापान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्य के प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।

मुरलीधरन ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सदस्य देशों का ऐसा भी एक वर्ग है जो अस्थायी श्रेणी के ही विस्तार का समर्थन करता है और स्थायी सदस्यता के विस्तार के विरोध में है।

ज्ञात हो कि भारत, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के संगठन इब्सा ने बुधवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सुधार की ‘धीमी’ गति पर ‘नाखुशी ’ प्रकट की थी और कहा था कि इस वैश्विक निकाय के विस्तार के लिए परिणामोन्मुखी प्रक्रिया की ओर बढ़ने का वक्त आ गया है।
इन तीनों देशों ने सुरक्षा परिषद के सुधार को शीघ्र पूरा करने की दृढ़ मांग की और कहा कि ऐसा नहीं कर पाने से अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
यह बयान तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की वीडियो कांफ्रेंस के बाद जारी किया गया। इस सम्मेलन में बातचीत मुख्य रूप से संयुक्त राष्ट्र में सुधार की मांग पर केंद्रित रही । बैठक की अध्यक्षता विदेश मंत्री एस जयशंकर ने की।
ये तीनों ही देश सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के प्रबल दावेदार हैं।
इब्सा ने एक बयान में कहा, ‘‘ सुरक्षा परिषद में सुधार में विफलता के अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा पर गंभीर परिणाम होंगे। यह सुनिश्चित करने के लिए उल्लेखनीय और तीव्र सुधार अहम है कि यह संस्था अधिक प्रतिनिधिकारक, प्रभावी और जवाबदेह हो तथा संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों एवं सिद्धांतों को पूरा करने में सक्षम रहे। ’’
सुरक्षा परिषद में अस्थायी सदस्य के रूप में भारत के निर्वाचन का हवाला देते हुए इब्सा ने कहा कि भारत इस मंच पर एक ‘मजबूत आवाज’ हेागा और वह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के मुताबिक नियम आधारित व्यवस्था का रक्षक बना रहेगा।
इस बीच, मुरलीधरन ने राज्यसभा में कहा, ‘‘सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता के मामले पर संयुक्त राष्ट्र चार्टर के प्रावधानों के अनुसार परिषद के स्वरूप और विस्तार की सीमा पर सहमति होने के बाद ही विचार किया जाएगा जिसके लिए संयुक्त राष्ट्र के दो तिहाई सदस्य देशों के अनुमोदन की आवश्यकता होगी।’’
संयुक्त राष्ट्र महासभा में अंतर सरकारी वार्ता (आईजीएन) प्रक्रिया सुरक्षा परिषद सुधार के विभिन्न पहलुओं पर विचार विमर्श कर रही है जिनमें इस परिषद की सदस्यता की श्रेणियां, वीटो का मसला, विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व, विस्तारित परिषद का आकार इत्यादि शामिल हैं।

मुरलीधरन ने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सुधारों पर चल रही अंतर सरकारी चर्चा से सक्रिय रुप से जुड़ा है और जी-4 समूह और सुधारोन्मुखी अन्य देशों के साथ- साथ इस संबंध में कार्य कर रहा है। जी-4 समूह देशों में भारत, जापान, ब्राजील और जर्मनी शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा, ‘‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार के मामले पर उच्चतम स्तरों सहित, सभी संगत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बैठकों में विचार विमर्श किया जाता है।’’

यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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