Edited By ,Updated: 18 Feb, 2015 10:37 AM
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आजकल बन रही बहुमंजिला इमारतों में पानी को ऊपर चढ़ाने के लिए और टायलेट, बाथरूम और किचन इत्यादि का गंदा पानी नीचे उतारने के लिए इमारतों में फ्लैट्स के मध्य में पाईप लगाए जाते हैं,
आजकल बन रही बहुमंजिला इमारतों में पानी को ऊपर चढ़ाने के लिए और टायलेट, बाथरूम और किचन इत्यादि का गंदा पानी नीचे उतारने के लिए इमारतों में फ्लैट्स के मध्य में पाईप लगाए जाते हैं, जिसके लिए फ्लैट्स में विशेष जगह छोड़ दी जाती है जिन्हें डक्ट कहते हैं। जब गंदा पानी नीचे उतरता है तो गंदगी के कारण पाईप जाम ना हो जाए उसके लिए जमीन में चेम्बर बनाए जाते हैं। इसलिए डक्ट को बनाते वक्त दो प्रकार की सावधानियां रखनी पड़ती हैं -
1. डक्ट कभी भी उत्तर दिशा, पूर्व दिशा, ईशान कोण एवं मध्य में नहीं बनानी चाहिए, क्योंकि जहां डक्ट बनती है सामान्यतः उस भाग को बहुमंजिला इमारतों के फ्लैट्स से अलग रखा जाता है। इस कारण फ्लैट का डक्ट वाला भाग कटा हुआ माना जाता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार पूर्व दिशा, उत्तर दिशा, ईशान कोण एवं मध्य का भाग कटा हुआ शुभ नहीं होता।
2. जहां डक्ट के पाईप उतरते हैं वहां जमीन पर चेम्बर बनाए जाते हैं। यदि यह चेम्बर उत्तर दिशा, पूर्व दिशा और ईशान कोण में होते हैं तो शुभ होते हैं, क्योंकि इन दिशाओं किसी भी प्रकार का गड्ढा होना शुभ माना जाता है, किन्तु ध्यान रहे जैसा कि, ऊपर लिखा है इन दिशाओं का कटा हुआ होना अशुभ होता है। इन दिशाओं के अलावा आग्नेय कोण, दक्षिण दिशा नैऋत्य कोण, पश्चिम दिशा एवं वायव्य कोण में डक्ट बनाए तो जा सकते हैं परन्तु यहां देने योग्य वाली बात यह है कि, जमीन में इन दिशाओं में गड्ढे नहीं बनाना चाहिए। ऐसी स्थिति में इन दिशाओं में ग्राऊण्ड फ्लोर में जमीन में गड्ढा ना करते हुए जमीन के ऊपर ही चेम्बर बनाना चाहिए ताकि यह चेम्बर अण्डरग्राऊण्ड ना होकर ओव्हर द ग्राऊण्ड हो जाए। इस प्रकार चेम्बर बनाने से किसी प्रकार का वास्तुदोष उत्पन्न नहीं होता।
- वास्तु गुरू कुलदीप सलूजा
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