Vastu Tips : दुकान खरीदते वक्त इन बातों का रखें ध्यान, खुद-ब-खुद बढ़ेगा मुनाफा

Edited By Updated: 08 Jan, 2026 02:07 PM

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Vastu Tips : वास्तु शास्त्र के अनुसार, व्यापार की सफलता केवल आपकी मेहनत और पूंजी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस स्थान की ऊर्जा पर भी निर्भर करती है जहां आप काम करते हैं। यदि दुकान या शोरूम का वास्तु सही हो, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है जिससे...

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Vastu Tips : वास्तु शास्त्र के अनुसार, व्यापार की सफलता केवल आपकी मेहनत और पूंजी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उस स्थान की ऊर्जा पर भी निर्भर करती है जहां आप काम करते हैं। यदि दुकान या शोरूम का वास्तु सही हो, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ता है जिससे ग्राहकों की संख्या और मुनाफे में वृद्धि होती है। यदि आप नई दुकान खरीदने या किराए पर लेने जा रहे हैं, तो ये उपाय व्यापार में बरकत ला सकते हैं। 

दुकान की दिशा और मुख
दुकान लेते समय सबसे महत्वपूर्ण पहलू उसकी दिशा है। वास्तु के अनुसार  व्यापार के लिए उत्तर दिशा को सबसे शुभ माना जाता है क्योंकि यह धन के देवता कुबेर की दिशा है। उत्तर मुखी दुकान में धन का आगमन निरंतर बना रहता है। पूर्व मुखी दुकान भी बहुत अच्छी मानी जाती है। यह सूर्य की दिशा है, जो आपके व्यापार को प्रसिद्धि और मान-सम्मान दिलाती है। अगर दुकान का कोना उत्तर-पूर्व में है, तो इसे ईश्वर का कोना माना जाता है। यहां शुद्ध ऊर्जा होती है।

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दुकान का आकार 
दुकान लेते समय उसके भौतिक आकार पर ध्यान देना अत्यंत आवश्यक है वास्तु के अनुसार दुकान हमेशा चौकोर या आयताकार होनी चाहिए। यह स्थिरता और विकास का प्रतीक है। ऐसी दुकान जो आगे से चौड़ी और पीछे से संकरी हो, उसे सिंहमुखी कहते हैं। व्यापारिक संस्थानों के लिए यह बहुत शुभ मानी जाती है। जो दुकान आगे से संकरी और पीछे से चौड़ी हो, वह घर के लिए तो अच्छी है लेकिन व्यापार के लिए इसे वास्तु में शुभ नहीं माना जाता।

मुख्य द्वार और प्रवेश 
दुकान का मुख्य द्वार वह स्थान है जहां से लक्ष्मी का प्रवेश होता है प्रवेश द्वार कभी भी बीच में नहीं होना चाहिए, इसे हमेशा शुभ पद पर रखना चाहिए। द्वार खोलते समय या बंद करते समय आवाज नहीं होनी चाहिए। दरवाजे के ठीक सामने कोई खंभा, पेड़ या बिजली का ट्रांसफार्मर नहीं होना चाहिए। इसे 'द्वार वेध' कहते हैं, जो व्यापार में रुकावटें पैदा करता है।

बैठने की व्यवस्था
दुकान के मालिक या मैनेजर के बैठने की दिशा उसकी निर्णय क्षमता को प्रभावित करती है दुकान के मालिक को हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में बैठना चाहिए, इस तरह कि उसका मुख उत्तर या पूर्व की ओर हो। पीछे ठोस दीवार होनी चाहिए, खिड़की नहीं। इससे व्यापार में स्थिरता आती है। बैठने के स्थान के ऊपर कोई बीम नहीं होना चाहिए वरना मानसिक तनाव बना रहता है।

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कैश काउंटर की सही स्थिति 
पैसे रखने की जगह व्यापार का हृदय है कैश काउंटर या तिजोरी को हमेशा इस तरह रखें कि वह उत्तर दिशा की ओर खुले। तिजोरी को दक्षिण या पश्चिम की दीवार से सटाकर रखें ताकि उसका मुंह उत्तर या पूर्व में हो। कैश बॉक्स कभी भी खाली न रखें। उसमें हमेशा कुछ चांदी के सिक्के या कुबेर यंत्र रखें।

सामान का भंडारण
भारी सामान और स्टॉक को सही दिशा में रखने से माल जल्दी बिकता है भारी माल, मशीनरी या कच्चा माल हमेशा दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। जल्दी बिकने वाला या हल्का सामान उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। उत्तर-पूर्व को हमेशा खाली और साफ रखें। यहाँ कचरा या भारी सामान रखने से धन की हानि होती है।

मंदिर और जल की व्यवस्था
दुकान में छोटा सा मंदिर हमेशा उत्तर-पूर्व में होना चाहिए। यहां नियमित रूप से दीप जलाएं। पीने के पानी का मटका या वाटर डिस्पेंसर भी उत्तर-पूर्व दिशा में ही रखना चाहिए। इससे ग्राहकों का मन शांत और प्रसन्न रहता है।

बिजली के उपकरण
आजकल हर दुकान में कंप्यूटर, इन्वर्टर या एसी होते हैं। वास्तु के अनुसार, बिजली से जुड़ी सभी वस्तुएं दक्षिण-पूर्व में होनी चाहिए। इससे तकनीकी खराबी कम होती है और ऊर्जा का संतुलन बना रहता है।

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