Edited By Sarita Thapa,Updated: 12 Jan, 2026 11:20 AM

क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिनभर बाहर की भागदौड़ और थकान के बाद जब घर पहुंचते हैं, तो सुकून की तलाश करते हैं। लेकिन अगर घर की चारदीवारी के अंदर कदम रखते ही आपका मन अशांत हो जाए या छोटी-छोटी बातों पर कलह और तनाव का माहौल बन जाए।
Rose Vastu Magic : क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो दिनभर बाहर की भागदौड़ और थकान के बाद जब घर पहुंचते हैं, तो सुकून की तलाश करते हैं। लेकिन अगर घर की चारदीवारी के अंदर कदम रखते ही आपका मन अशांत हो जाए या छोटी-छोटी बातों पर कलह और तनाव का माहौल बन जाए। वास्तु शास्त्र कहता है कि कभी-कभी घर में जमा हुई नकारात्मक ऊर्जा हमारे रिश्तों की मिठास को सोख लेती है। ऐसे में महंगे रत्नों या जटिल पूजा-पाठ से पहले, प्रकृति ने हमें एक बहुत ही कोमल और शक्तिशाली समाधान दिया है- गुलाब। गुलाब का फूल न केवल अपनी सुंदरता के लिए जाना जाता है, बल्कि इसमें वातावरण की नकारात्मकता को खींच लेने की अद्भुत आध्यात्मिक शक्ति होती है। तो आइए जानते हैं कैसे गुलाब की चंद पंखुड़ियों का एक छोटा सा जादुई उपाय आपके घर के भारी माहौल को खुशियों में बदल सकता है और आपके मन को फिर से शांत और प्रफुल्लित कर सकता है।

कांच के बर्तन और गुलाब का जल
वास्तु के अनुसार, घर के मुख्य हॉल या लिविंग रूम के ईशान कोण में एक कांच के पारदर्शी बर्तन में साफ पानी भरें और उसमें ताजे गुलाब की कुछ पंखुड़ियां डाल दें। यह पानी घर में आने वाली नकारात्मक तरंगों को सोख लेता है और घर के सदस्यों के बीच संवाद को मधुर बनाता है। इस पानी को हर दिन बदलें।
शयनकक्ष के लिए खास उपाय
यदि पति-पत्नी के बीच तनाव रहता है, तो सिरहाने के पास एक छोटी सुंदर कटोरी में ताजे गुलाब की पंखुड़ियां रखें। गुलाब की धीमी खुशबू और उसकी गुलाबी आभा मन को शांत करती है और वैवाहिक संबंधों में मधुरता लाती है।

कपूर और गुलाब का संगम
शाम के समय एक कपूर का टुकड़ा जलाएं और उस पर गुलाब की सूखी पंखुड़ियां डाल दें। इसका धुआं पूरे घर में घुमाएं। यह उपाय घर की 'डेड एनर्जी' को खत्म करता है और तनाव के माहौल को शांति में बदल देता है।
घर के प्रवेश द्वार पर छिड़काव
थोड़े से पानी में गुलाब की पंखुड़ियों को कुछ देर के लिए छोड़ दें। सुबह उठकर उस पानी का छिड़काव घर के मुख्य द्वार पर करें। वास्तु के अनुसार, इससे बाहरी नकारात्मकता घर के अंदर प्रवेश नहीं कर पाती।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ