Edited By Sarita Thapa,Updated: 04 Jan, 2026 12:48 PM

वास्तु शास्त्र में कुछ पौधों को केवल हरियाली का साधन नहीं, बल्कि सौभाग्य का द्वार माना गया है। इन्हीं में से एक दिव्य पौधा है अपराजिता। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है-जिसे कभी कोई पराजित न कर सके।
Aparajita Plant Vastu Tips : वास्तु शास्त्र में कुछ पौधों को केवल हरियाली का साधन नहीं, बल्कि सौभाग्य का द्वार माना गया है। इन्हीं में से एक दिव्य पौधा है अपराजिता। जैसा कि इसके नाम से ही स्पष्ट है-जिसे कभी कोई पराजित न कर सके। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस घर के आंगन में अपराजिता की बेल लहराती है, वहां नकारात्मक शक्तियां कभी प्रवेश नहीं कर पातीं। इसे विष्णुकांता भी कहा जाता है क्योंकि इसके नीले फूल भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को अत्यंत प्रिय हैं। वास्तु विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पौधे को सही दिशा और सही नियम के साथ लगाया जाए, तो यह न केवल घर की दरिद्रता को जड़ से मिटा सकता है, बल्कि कर्ज से दबे व्यक्ति की किस्मत भी रातों-रात बदल सकता है। तो आइए जानते हैं कि अपराजिता के पौधे का वह कौन सा गुप्त वास्तु नियम है, जो किसी भी कंगाल को मालामाल बनाने की शक्ति रखता है।
देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु का वास
अपराजिता का नीला फूल भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। वास्तु के अनुसार, जिस घर में नीला अपराजिता होता है, वहां मां लक्ष्मी की असीम कृपा बनी रहती है। यह पौधा घर के सदस्यों की बुद्धि को कुशाग्र करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
सही दिशा का चुनाव
वास्तु शास्त्र में दिशा का विशेष महत्व है। गलत दिशा में लगाया गया पौधा लाभ की जगह नुकसान भी पहुंचा सकता है।
ईशान कोण (उत्तर-पूर्व)
अपराजिता लगाने के लिए सबसे शुभ दिशा उत्तर-पूर्व मानी गई है। इसे देवताओं की दिशा कहा जाता है, जिससे घर में सुख-शांति आती है। यदि ईशान कोण में जगह न हो, तो इसे उत्तर या पूर्व दिशा में भी लगाया जा सकता है। इसे कभी भी पश्चिम या दक्षिण दिशा में नहीं लगाना चाहिए, वरना यह आर्थिक तंगी का कारण बन सकता है।

किस दिन लगाएं अपराजिता ?
वास्तु के अनुसार, अपराजिता का पौधा लगाने के लिए गुरुवार या शुक्रवार का दिन सबसे उत्तम होता है। गुरुवार भगवान विष्णु का दिन है और शुक्रवार मां लक्ष्मी का। इन दिनों में इसे लगाने से घर में बरकत बढ़ती है।
शनि दोष से मुक्ति
जिन लोगों की कुंडली में शनि भारी है या साढ़ेसाती चल रही है, उनके लिए अपराजिता का पौधा वरदान समान है। शनिवार के दिन शनि देव को इसके नीले फूल अर्पित करने से शनि दोष का प्रभाव कम होता है और बिगड़े हुए काम बनने लगते हैं।
तरक्की के द्वार खोलता है नीला फूल
अगर आपके काम में बार-बार बाधा आ रही है या नौकरी में तरक्की रुकी हुई है, तो अपराजिता की बेल को घर के मुख्य द्वार के दाहिनी ओर लगाएं। जैसे-जैसे यह बेल ऊपर की ओर चढ़ेगी, आपके परिवार की उन्नति के रास्ते भी खुलते जाएंगे।
इन बातों का रखें खास ख्याल
यदि पौधा सूख जाए, तो उसे तुरंत हटाकर नया पौधा लगाएं। सूखा पौधा नकारात्मकता लाता है। अपराजिता के पास कभी भी कूड़ादान या गंदी चीजें न रखें। ध्यान रखें कि इस बेल की शाखाएं जमीन को न छुएं। इसे किसी रस्सी या डंडे के सहारे ऊपर की ओर चढ़ाएं।

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