Edited By ,Updated: 13 Sep, 2015 11:56 AM

भारतीय दुल्हन की बात आती है, तो दिमाग में सबसे पहला खयाल आता है लाल जोड़े में लिपटी दुल्हन का। प्राचीनकाल से ऐसे ही चला आ रहा है।
भारतीय दुल्हन की बात आती है, तो दिमाग में सबसे पहला खयाल आता है लाल जोड़े में लिपटी दुल्हन का। प्राचीनकाल से ऐसे ही चला आ रहा है। भारत में तो लाल रंग के बिना किसी शादी की कल्पना भी नहीं की जा सकती। हिंदू धर्म में रिति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार दुल्हन और विवाहित महिलाएं सफेद रंग धारण नहीं करती।
प्रत्येक रंग की अपनी-अपनी विशेषता होती है। किसी भी रंग को एक-दूसरे से कम या ज्यादा नहीं आंका जा सकता। माना जाता है की लाल रंग के जोड़े में विदा दुल्हन का दांपत्य जीवन सफल रहता है। केवल पति की मौत के बाद महिला सफेद साड़ी धारण करती हैं।
वैज्ञानिक दृष्टि से लाल रंग में महिलाएं बहुत खूबसूरत नजर आती हैं और पुरूष चुंबक की तरह उनकी तरफ खिंचे चले जाते हैं। लाल रंग प्यार, रोमांस और पैशन का प्रतीक माना जाता है। लाल रंग में महिलाएं अधिक सुंदर और आकर्षित दिखती हैं एवं सबके आकर्षण का केंद्र बिंदू बनती हैं।
हिन्दू धर्म का अनुसरण करने वाले विवाहित महिलाओं का सफेद रंग धारण करना अशुभ मानते हैं। उनके धर्म से संबंधित किसी भी शुभ काम में सफेद रंग का प्रयोग करना वर्जित है। ये सब बड़े-बुजुर्गों द्वारा कही बातें हैं जिसका आने वाली पीढियां अनुकरण करती आ रही हैं।
हिन्दू धर्म शास्त्रों में किसी भी ग्रंथ में ऐसा उल्लेख नहीं मिलता की सफेद रंग को दुल्हन नहीं पहन सकती या विवाहित महिलाओं के लिए ये रंग अशुभता का संचार करता है।
आज से कुछ समय पूर्व नवविवाहिता जब गृह प्रवेश करती थी तो उसे सफेद ओढ़नी ओढ़ाकर ही घर में प्रवेश करवाया जाता था ताकि वो ससुराल पक्ष के लिए पावन और पवित्र लक्ष्मी रूप बनकर आए। आज भी बहुत से स्थानों पर इस पंरपरा को निभाया जाता है।