‘गवर्नमैंट ई-मार्कीटप्लेस’ : एक बहुमूल्य रत्न

Edited By Updated: 04 May, 2023 04:44 AM

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गवर्नमैंट ई-मार्कीटप्लेस (जी.ई.एम.) ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के अंत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली। इसके माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकारों, विभिन्न आधिकारिक एजैंसियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सहकारी समितियों ने किसी एक वित्तीय वर्ष में...

गवर्नमैंट ई-मार्कीटप्लेस (जी.ई.एम.) ने वित्तीय वर्ष 2022-23 के अंत में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली। इसके माध्यम से केंद्र एवं राज्य सरकारों, विभिन्न आधिकारिक एजैंसियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और सहकारी समितियों ने किसी एक वित्तीय वर्ष में 50 लाख ऑनलाइन लेन-देन के जरिए दो लाख करोड़ रुपए (24 बिलियन अमरीकी  डॉलर) से अधिक मूल्य की वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद की। यह समावेशी विकास, पारदर्शिता, दक्षता और भ्रष्टाचारमुक्त शासन के प्रति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की वचनबद्धता का एक उत्कृष्ट प्रमाण है। 

जी.ई.एम. सही अर्थों में एक रत्न है। इसने पुराने पड़ चुके आपूर्ति और निपटान महानिदेशालय (डी.जी.एस.एंड डी.) का स्थान लिया है। उचित रूप से, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के नए कार्यालय भवन,  वाणिज्य भवन का निर्माण उस भूमि पर किया गया है जहां कभी डी.जी.एस. एंड डी. हुआ करता था। इस भवन के शिलान्यास समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने सही ही कहा था : ‘‘अब 100 साल से अधिक पुराने इस संगठन को बंद कर दिया गया है और इसके स्थान पर डिजिटल तकनीक पर आधारित एक नए निकाय। गवर्नमैंट-ई-मार्कीटप्लेस को लाया गया है। जी.ई.एम. ने सरकार द्वारा आवश्यक वस्तुओं की खरीद के तौर-तरीकों को पूरी तरह से बदल दिया है।’’ 

अगस्त 2016 में स्थापित होने के बाद से जी.ई.एम. के कामकाज में असाधारण प्रगति हुई है। इस पोर्टल पर होने वाले लेन-देन का कुल मूल्य 2022-23 में लगभग दोगुना होकर पिछले वित्तीय वर्ष में 1.07 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2.01 लाख करोड़ रुपए हो गया। वित्तीय वर्ष 2016-17 में 422 करोड़ रुपए के कारोबार के साथ इसकी अनूठी यात्रा शुरू हुई थी। इस पोर्टल का शुभारंभ वस्तुओं एवं सेवाओं की सार्वजनिक खरीद को प्रधानमंत्री के ‘न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन’ के मिशन और सरकारी प्रणालियों को ईमानदार, प्रभावी और सभी के लिए सुलभ बनाने हेतु प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की उनकी रणनीति के अनुरूप ढालने के उद्देश्य से किया गया था। 

जी.ई.एम. की प्रतिस्पर्धी बोली जैसी पारदर्शी कार्यप्रणालियों ने सरकारी विभागों एवं उपक्रमों को करदाताओं के लगभग 40,000 करोड़ रुपए बचाने में मदद की है। इस तरह की पहलों ने मोदी सरकार को राजकोषीय स्थिति से समझौता किए बिना कल्याणकारी कार्यों पर होने वाले व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि करने में मदद की है। कई अर्थों  में, जी.ई.एम. लोगों द्वारा प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के पक्ष में जबरदस्त मतदान किए जाने के बाद से शासन-प्रशासन में लाए गए बदलावों का एक महत्वपूर्ण प्रतीक है। लोग पिछली सरकार से तंग आ चुके थे, जो हमेशा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी रहती थी। उस सरकार के कई मंत्रियों के लिए तो विभिन्न अखबारों के मुख्य पृष्ठों पर छपने वाली शर्म और लांछन की रोज की खुराक ही उनकी जीवनशैली का एक आधार थी। 

इस संदर्भ में जी.ई.एम. का महत्व वित्तीय दृष्टि से इसकी अभूतपूर्व वृद्धि से कहीं अधिक है और यह अपने आप में ई-कॉमर्स की किसी भी बड़ी कम्पनी को ईष्र्या से भर देने के लिए काफी है। इस नई प्रणाली ने सदियों पुरानी उन प्रक्रियाओं की जगह ली है जो अक्षमताओं और भ्रष्टाचार से ग्रस्त थीं। सरकारी खरीद अपारदर्शी, काफी समय लेने वाली, बोझिल और भ्रष्टाचार एवं निर्माताओं की गुटबंदी (कार्टेलाइजेशन) में लिप्त हुआ करती थी। केवल कुछ विशेषाधिकार प्राप्त लोग ही प्रवेश संबंधी विशाल बाधाओं को पार कर पाते थे। खरीदारों के पास विशेषाधिकार प्राप्त और अक्सर बेईमान आपूर्तिकत्र्ताओं से ऊंची एवं बिना मोल-भाव वाली कीमतों पर घटिया सामान खरीदने के अलावा और कोई विकल्प नहीं था जबकि संभावित विक्रेताओं को सूचीबद्ध होने और फिर समय पर भुगतान पाने के लिए पूरी तरह से सुविधा प्रदान करने वाली एजैंसी की दया पर निर्भर रहना होता था और दर-दर भटकना पड़ता था। 

कागजरहित, नकद रहित और फेसलैस जी.ई.एम. की यह प्रणाली खरीदारों को असंख्य विक्रेताओं से सीधे प्रतिस्पर्धी दरों पर वस्तुओं एवं सेवाओं की खरीद करने की आजादी देती है। यह नई प्रतिस्पर्धी प्रणाली प्रधानमंत्री मोदी की डिजिटल इंडिया की पहल पर आधारित क्रांतिकारी बदलाव लाने वाला एक और कदम है। इसने सार्वजनिक खरीद के तौर-तरीकों को बदल दिया है और सूक्ष्म,  लघु एवं मध्यम उद्यमों (एम.एस.एम.ई.) और छोटे व्यापारियों के लिए लोकप्रिय सरकारी आर्डर हासिल करना संभव बनाया है। इस पोर्टल की परिवर्तनकारी सफलता पूरी अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत है क्योंकि यह ‘रत्न’ अमृत काल के दौरान दक्षता और विश्वसनीयता को बढ़ा रहा है। खासकर उस समय में जब भारत प्रधानमंत्री मोदी के निर्णायक और दूरदर्शी नेतृत्व में 2047 तक एक विकसित देश बनने की राह पर अग्रसर है।-पीयूष गोयल

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