कर्मचारियों की मौजः 200 कंपनियों का बड़ा फैसला, हफ्ते में सिर्फ 4 दिन काम, 3 दिन की छुट्टी

Edited By Updated: 29 Jan, 2025 01:18 PM

200 companies take a big decision work only 4 days a week 3 days off

भारत में जहां 90 घंटे और 70 घंटे काम करने की वकालत की जा रही है, वहीं ब्रिटेन की 200 कंपनियों ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसके तहत कर्मचारियों को केवल चार दिन काम करना होगा और तीन दिन की छुट्टी मिलेगी। यह कदम वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बनाने और...

बिजनेस डेस्कः भारत में जहां 90 घंटे और 70 घंटे काम करने की वकालत की जा रही है, वहीं ब्रिटेन की 200 कंपनियों ने एक ऐतिहासिक निर्णय लिया है, जिसके तहत कर्मचारियों को केवल चार दिन काम करना होगा और तीन दिन की छुट्टी मिलेगी। यह कदम वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बनाने और कर्मचारियों की संतुष्टि बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है। इस नई नीति का लाभ 5,000 से अधिक कर्मचारियों को मिलेगा, जो विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं, जैसे कि मार्केटिंग, टेक्नोलॉजी और चैरिटी।

नए दौर का नया नियम

इस फैसले के पीछे का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। चार दिन का कार्य सप्ताह अपनाने वाली कंपनियों का मानना है कि यह पुरानी आर्थिक संरचना से बाहर निकलने का एक तरीका है। द गार्जियन की रिपोर्ट के अनुसार, फाउंडेशन कैम्पैन के निदेशक जोई राइल ने कहा कि "9 से 5 का वर्क पैटर्न 100 साल पहले विकसित हुआ था और अब यह आधुनिक समय के लिए उपयुक्त नहीं है।" उन्होंने आगे कहा कि इस बदलाव से कर्मचारियों को 50 फीसदी अधिक फ्री टाइम मिलेगा, जिससे वे खुशहाल और संतुष्ट जीवन जी सकेंगे।

सैलरी उतनी ही मिलेगी

सबसे खास बात ये है कि काम के दिन कम करने के बाद भी कर्मचारियों की सैलरी में कोई कटौती नहीं की जाएगी। इससे कर्मचारियों को बिना किसी वित्तीय चिंता के अपने काम पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिलेगा। कंपनियों ने इस नीति को लागू करने के लिए गंभीरता से विचार किया है, जिससे न केवल कर्मचारी बल्कि कंपनियां भी लाभान्वित होंगी।

70, 90 घंटे वालों को मिला जवाब

ब्रिटेन की इन 200 कंपनियों के फैसले का असर वैश्विक संदर्भ में भी महत्व रखता है, खासकर तब जब भारत में कुछ कंपनियां अपने कर्मचारियों से 70 से 90 घंटे काम करने की अपेक्षा कर रही हैं। ब्रिटेन का यह कदम न केवल कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, बल्कि यह अन्य देशों के लिए भी एक उदाहरण पेश करता है कि कैसे वर्क-लाइफ बैलेंस को प्राथमिकता दी जा सकती है।
 

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