क्रिप्टो में भूचाल, 2022 के बाद बिटकॉइन में सबसे बड़ी गिरावट, 63,300 डॉलर तक पहुंची कीमत

Edited By Updated: 06 Feb, 2026 11:57 AM

bitcoin experiences its biggest since 2022 price falls to 63 300

क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पिछले दो दिनों से भारी उतार-चढ़ाव और तेज गिरावट का दौर जारी है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन गुरुवार को करीब 12.6% गिरकर 63,300 डॉलर तक पहुंच गई, जो अक्टूबर 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर रहा। यह नवंबर 2022 की...

बिजनेस डेस्कः क्रिप्टोकरेंसी बाजार में पिछले दो दिनों से भारी उतार-चढ़ाव और तेज गिरावट का दौर जारी है। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन गुरुवार को करीब 12.6% गिरकर 63,300 डॉलर तक पहुंच गई, जो अक्टूबर 2024 के बाद का सबसे निचला स्तर रहा। यह नवंबर 2022 की उथल-पुथल के बाद की सबसे बड़ी दैनिक गिरावट मानी जा रही है। शुक्रवार को भी बिटकॉइन करीब 9% गिरकर 65,000 डॉलर के आसपास ट्रेड करती दिखी। इस हफ्ते अब तक बिटकॉइन करीब 17% और साल 2026 में अब तक करीब 28% टूट चुका है।

दूसरी सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी ईथर भी दबाव में रही और एक दिन में 13% से ज्यादा गिर गई। साल 2026 में अब तक इसमें करीब 38% की गिरावट दर्ज की जा चुकी है। अक्टूबर 2025 के रिकॉर्ड हाई से अब तक पूरे क्रिप्टो बाजार का मार्केट कैप 2 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा घट चुका है।

बिकवाली और लिक्विडेशन का असर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, जोखिम से दूरी, भारी लिक्विडेशन, टेक शेयरों में कमजोरी और अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर सख्ती की आशंकाओं ने निवेशकों को झटका दिया है। कॉइनग्लास के आंकड़ों के अनुसार, सिर्फ 24 घंटों में लगभग 1 बिलियन डॉलर के बिटकॉइन पोजीशन जबरन बंद हो गए, जिससे बिकवाली का दबाव और तेज हो गया और पूरे बाजार में डोमिनो प्रभाव देखने को मिला।

ग्लोबल बाजार और अन्य एसेट्स का असर

क्रिप्टो बाजार ऐसे समय दबाव में आया है जब निवेशक जोखिम भरे एसेट्स से दूरी बना रहे हैं। सोना-चांदी में अस्थिरता और टेक शेयरों में बिकवाली ने माहौल और कमजोर किया। इसी दौरान S&P 500 सात हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंचा, जबकि नैस्डैक दो महीने से ज्यादा के निचले स्तर पर फिसल गया।

‘कैपिटुलेशन मोड’ में बाजार

कॉइन ब्यूरो के सह-संस्थापक निक पकरिन के अनुसार, क्रिप्टो बाजार फिलहाल ‘कैपिटुलेशन मोड’ में नजर आ रहा है और यह केवल अल्पकालिक सुधार नहीं बल्कि बड़े रीसेट की शुरुआत हो सकती है, जो कई महीनों तक चल सकती है।

अमेरिकी नीति और संस्थागत निकासी

अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर सख्त रुख की आशंका और फेड नेतृत्व में संभावित बदलाव ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। इसके अलावा संस्थागत निवेशकों द्वारा क्रिप्टो ETFs से लगातार निकासी भी गिरावट का बड़ा कारण बनी है। डॉयचे बैंक के अनुसार, जनवरी में अमेरिकी स्पॉट बिटकॉइन ETFs से 3 बिलियन डॉलर से ज्यादा निकासी हुई, जबकि इससे पहले के महीनों में भी अरबों डॉलर बाहर निकाले गए।

टेक सेक्टर की कमजोरी और आगे का जोखिम

विश्लेषकों का कहना है कि बिटकॉइन अब टेक और AI शेयरों के साथ ज्यादा तालमेल दिखा रहा है। टेक सेक्टर में हालिया गिरावट ने भी डिजिटल एसेट्स पर दबाव बढ़ाया है। साथ ही चेतावनी दी जा रही है कि यदि कीमतों में और गिरावट आती है तो क्रिप्टो माइनर्स पर दबाव बढ़ सकता है और जबरन लिक्विडेशन का जोखिम फिर बढ़ सकता है।
 

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