Share Market Crash: शेयर बाजार क्रैश, निवेशकों के डूबे 4 लाख करोड़ रुपए, गिरावट के 5 बड़े कारण

Edited By Updated: 30 Jan, 2026 10:40 AM

stock market crashes investors lose 4 lakh crore 5 major reasons

केंद्रीय बजट से पहले निवेशकों की सतर्कता के चलते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए, जिससे बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार...

बिजनेस डेस्कः केंद्रीय बजट से पहले निवेशकों की सतर्कता के चलते शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार गिरावट देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स और निफ्टी दबाव में आ गए, जिससे बाजार पूंजीकरण में बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

बीएसई सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में करीब 625 अंक या 0.75% टूटकर 81,941.03 के निचले स्तर तक आ गया। वहीं, निफ्टी 50 भी 194 अंक या 0.75% गिरकर 25,224.35 पर कारोबार करता नजर आया और यह 25,300 के अहम स्तर से नीचे फिसल गया। इस तेज बिकवाली के चलते महज 15 मिनट के भीतर निवेशकों की करीब 4 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति साफ हो गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल मार्केट कैप घटकर 455.73 लाख करोड़ रुपए रह गया।

 

शेयर बाजार में गिरावट के 5 बड़े कारण

 

बजट को लेकर बढ़ी सतर्कता

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण रविवार को केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं। इस बार बजट के लिए एक विशेष ट्रेडिंग सत्र भी रखा गया है। ऐसे में निवेशक बड़े दांव लगाने से बचते नजर आए। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. वी. के. विजयकुमार के मुताबिक, जैसे-जैसे बजट का दिन करीब आ रहा है, बाजार के सामने अवसरों के साथ-साथ चुनौतियां भी बढ़ रही हैं।

रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के आसपास बना रहा। शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में इसमें थोड़ी मजबूती दिखी और यह 7 पैसे बढ़कर 91.92 पर आ गया लेकिन पिछले सत्र में यह 91.9850 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक गिर चुका था। रुपए की कमजोरी से पूंजी निकासी और आयातित महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ीं, जिसका सीधा असर शेयर बाजार पर पड़ा।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी। मध्य पूर्व में तनाव और ईरान पर संभावित अमेरिकी कार्रवाई की आशंकाओं के चलते तेल की कीमतें पांच महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। भारत जैसे शुद्ध तेल आयातक देश के लिए ऊंची तेल कीमतें महंगाई, चालू खाता घाटा और कंपनियों की लागत बढ़ने का संकेत देती हैं।

वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचाव का माहौल

वैश्विक बाजारों में भी सतर्कता का माहौल बना रहा। एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखा गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और फेडरल रिजर्व से जुड़े फैसलों ने वैश्विक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया।

तकनीकी संकेतों से कमजोरी के संकेत

तकनीकी संकेत भी अल्पावधि में कमजोरी की ओर इशारा कर रहे थे। हालांकि हालिया तेजी से निफ्टी कुछ अहम सपोर्ट लेवल से ऊपर निकला है लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि नए ट्रिगर्स की कमी में ऊंचे स्तर टिके रहना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

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