सेकेंड हैंड कारों की बंपर सेल, कीमतों में 50% तक की गिरावट, जानिए कहां मिल रही हैं सबसे सस्ती कारें

Edited By Updated: 05 Jul, 2025 12:38 PM

bumper sale of second hand cars prices up to 50

राजधानी दिल्ली में सेकेंड हैंड कारों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पुराने वाहनों पर लगे प्रतिबंधों के चलते सेकेंड हैंड कारों की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। यह जानकारी शुक्रवार को चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दी।

बिजनेस डेस्कः राजधानी दिल्ली में सेकेंड हैंड कारों की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पुराने वाहनों पर लगे प्रतिबंधों के चलते सेकेंड हैंड कारों की कीमतों में 40 से 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। यह जानकारी शुक्रवार को चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने दी।

CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल के अनुसार, पुराने वाहनों पर लागू प्रतिबंधों के कारण दिल्ली का सेकेंड हैंड कार बाजार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। करीब 60 लाख वाहनों पर असर पड़ा है। दिल्ली में पेट्रोल कारों की अधिकतम उम्र 15 साल और डीजल कारों की 10 साल तय की गई है, जिसके बाद उन्हें सड़कों पर चलने की अनुमति नहीं है।

दिल्ली में सस्ती कारें, बाहरी राज्यों में बढ़ी मांग

पुरानी कारों की कीमतें गिरने से बाहरी राज्यों से खरीदार दिल्ली का रुख कर रहे हैं। करोल बाग, प्रीत विहार, पीतमपुरा और मोती नगर जैसे इलाकों में 1,000 से अधिक सेकेंड हैंड कार डीलर सस्ते दामों पर कारें बेच रहे हैं। ये कारें आमतौर पर पंजाब, राजस्थान, यूपी, बिहार, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में जाती हैं।

लक्ज़री सेकेंड हैंड कारें भी सस्ती

गोयल के अनुसार, पहले जो लक्ज़री सेकेंड हैंड कारें ₹6–7 लाख में बिकती थीं, वे अब ₹4–5 लाख में ही खरीदी जा सकती हैं। बाहरी राज्यों से आने वाले खरीदार मौजूदा स्थिति को समझकर आक्रामक मोलभाव कर रहे हैं।

एनओसी और कागजी प्रक्रिया बनी परेशानी

कार डीलरों ने यह भी बताया कि दूसरे राज्यों में बिक्री के लिए जरूरी NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) मिलने में कठिनाई हो रही है। पहले यह प्रक्रिया सरल थी, लेकिन अब सरकारी विभागों की धीमी प्रक्रिया और तकनीकी जटिलताओं के कारण डीलरों को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

दिल्ली सरकार ने प्रतिबंध हटाने का किया अनुरोध

उल्लेखनीय है कि दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई से पुराने वाहनों के संचालन पर रोक लगाई है, जो अदालत के आदेश पर आधारित है। हालांकि, इस निर्णय का व्यापक विरोध होने पर सरकार ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) से तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध हटाने का अनुरोध किया है।

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