RBI के नए नियमों से कैपिटल मार्केट शेयरों में भूचाल, BSE, एंजेल वन, ग्रो के शेयर 10% तक टूटे

Edited By Updated: 16 Feb, 2026 11:51 AM

capital market stocks are rocked by rbi s new rules shares falling up to 10

16 फरवरी को कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। BSE Limited, Angel One और Groww जैसी कंपनियों के शेयरों में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में यह दबाव Reserve Bank of India (RBI) के नए सख्त नियमों के ऐलान के...

बिजनेस डेस्कः 16 फरवरी को कैपिटल मार्केट से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट देखने को मिली। BSE Limited, Angel One और Groww जैसी कंपनियों के शेयरों में 10% तक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में यह दबाव Reserve Bank of India (RBI) के नए सख्त नियमों के ऐलान के बाद आया है।

क्या हैं नए नियम?

RBI ने “कमर्शियल बैंक – क्रेडिट फैसिलिटीज अमेंडमेंट डायरेक्शंस, 2026” जारी किए हैं, जो 1 अप्रैल 2026 से लागू होंगे।

इन नियमों के तहत अब बैंक स्टॉक ब्रोकर्स और अन्य मार्केट इंटरमीडियरीज को केवल पूरी तरह सुरक्षित (फुली सिक्योर्ड) आधार पर ही कर्ज दे सकेंगे। आंशिक गारंटी या केवल प्रमोटर गारंटी अब पर्याप्त नहीं मानी जाएगी।

अगर बैंक किसी एक्सचेंज या क्लियरिंग कॉरपोरेशन के पक्ष में बैंक गारंटी जारी करते हैं, तो उसे कम से कम 50% कोलैटरल से सुरक्षित करना होगा। इसमें से 25% हिस्सा नकद या नकद समकक्ष साधनों में होना अनिवार्य है।

यदि इक्विटी शेयर को कोलैटरल के रूप में लिया जाता है, तो उसकी वैल्यू पर कम से कम 40% का हेयरकट लागू होगा।

प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग पर सख्ती

RBI ने स्पष्ट किया है कि बैंक अब ब्रोकर्स की प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग (अपने पैसे से ट्रेडिंग) को फंड नहीं कर सकेंगे। हालांकि, मार्केट मेकिंग और डेट सिक्योरिटीज की अल्पकालिक वेयरहाउसिंग के लिए फंडिंग जारी रह सकती है।

मार्जिन ट्रेडिंग फैसिलिटी (MTF) के तहत क्लाइंट को दिया जाने वाला कर्ज जारी रहेगा लेकिन बैंकों को मार्जिन कॉल की शर्तें लागू करनी होंगी और कोलैटरल की निरंतर निगरानी करनी होगी। इन सभी एक्सपोजर को अब बैंकों की कैपिटल मार्केट एक्सपोजर लिमिट में शामिल किया जाएगा।

क्यों घबराए निवेशक?

विश्लेषकों का मानना है कि इन नियमों से ब्रोकर्स की फंडिंग लागत बढ़ सकती है और बैंक ऋण की उपलब्धता सीमित हो सकती है। इससे ट्रेडिंग गतिविधियों, खासकर F&O सेगमेंट में, दबाव आ सकता है।

ब्रोकरेज फर्मों के अनुसार, जिन कंपनियों का मार्जिन ट्रेडिंग पोर्टफोलियो तेजी से बढ़ रहा है, उन्हें अपनी फंडिंग रणनीति पर पुनर्विचार करना पड़ सकता है। कुछ कंपनियों को विस्तार के लिए पूंजी बाजार से अतिरिक्त फंड जुटाना पड़ सकता है।

F&O वॉल्यूम पर संभावित असर

उद्योग अनुमानों के मुताबिक, कुल F&O वॉल्यूम में प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग की हिस्सेदारी लगभग 40% है। नए नियमों के तहत यदि ब्रोकर्स को 100% कोलैटरल, जिसमें आधा नकद में हो, उपलब्ध कराना होगा तो उनकी लागत बढ़ेगी।

हालांकि, क्लाइंट ट्रेड्स के लिए जारी बैंक गारंटी पर इन नियमों का सीधा असर नहीं पड़ेगा। फिर भी, इंट्राडे लिमिट्स और ट्रेडिंग गतिविधियों पर अल्पकालिक दबाव देखने को मिल सकता है।

कुल मिलाकर, RBI का यह कदम जोखिम प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में माना जा रहा है लेकिन अल्पकाल में कैपिटल मार्केट सेक्टर पर इसका दबाव साफ दिखाई दे रहा है।
 

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