Edited By jyoti choudhary,Updated: 03 Feb, 2026 01:36 PM

भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी India-US Trade Deal आखिरकार पक्की हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील की घोषणा करते हुए कहा कि भारत पर लागू टैरिफ तुरंत घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाएगा। इससे पहले भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ...
बिजनेस डेस्कः भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी India-US Trade Deal आखिरकार पक्की हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस डील की घोषणा करते हुए कहा कि भारत पर लागू टैरिफ तुरंत घटाकर 18 फीसदी कर दिया जाएगा। इससे पहले भारत ने यूरोपीय यूनियन के साथ ‘Mother of All Deals’ कहलाने वाले India-EU FTA की घोषणा की थी। अब भारत के लिए उसका सबसे बड़ा बाजार फिर से खुल गया है।
शेयर बाजार में रॉकेट की तरह तेजी
डील की खबर के साथ ही भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी देखने को मिली। मंगलवार को बाजार खुलते ही BSE सेंसेक्स में झटके में 24,000 अंक की बढ़त दर्ज की गई, जबकि NSE निफ्टी भी 700 से ज्यादा अंक उछलकर ओपन हुआ।
Reliance, Adani Ports समेत कई बड़ी कंपनियों के स्टॉक्स में तूफानी खरीदारी हुई। शुरुआती मिनटों में ही निवेशकों ने लगभग 20 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति हासिल की। BSE Market Cap भी पिछले बंद 4,55,00,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 4,74,00,000 करोड़ रुपए के पार पहुंच गया।
रुपए में जबरदस्त मजबूती
India-US Trade Deal की खबर से भारतीय मुद्रा पर भी असर पड़ा। मंगलवार को INR अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 111 पैसे मजबूत होकर 90.40 पर खुला, जबकि सोमवार को यह 91.51 पर बंद हुआ था।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह तेजी भारत-अमेरिका व्यापार समझौते और ट्रंप के ऐलान के बाद निवेशकों में बढ़े भरोसे का नतीजा है। वर्ष 2026 में रुपएमें पहले तक 0.56% की कमजोरी, जबकि सालाना आधार पर 4.55% की गिरावट देखी गई थी।
सोने-चांदी की गिरावट पर लगा ब्रेक
शेयर बाजार और रुपया ही नहीं, कमोडिटी मार्केट में भी डील की खबर का असर दिखा। MCX पर सोना-चांदी की गिरावट पर ब्रेक लगा।
- सोना फिर 1.52 लाख रुपए के करीब पहुंच गया
- चांदी में 28,000 रुपए की तेजी आई
विशेषज्ञों के अनुसार, ट्रेड डील ने बाजार में अनिश्चितता को कम किया और निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
FIIs की वापसी की संभावना
टैरिफ और भारत-अमेरिका के बीच तनाव के कारण विदेशी निवेशक (FIIs) बाजार से दूरी बनाए हुए थे और लगातार बिकवाली हो रही थी। अब डील के बाद FIIs की वापसी की संभावना बढ़ गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह निवेशक पॉलिसी रिस्क पर फोकस करते हैं और डील से पॉलिसी स्टेबिलिटी का भरोसा बढ़ा है। इसके चलते भारत में बड़े निवेश आने का सिलसिला शुरू हो सकता है।