Edited By jyoti choudhary,Updated: 01 Feb, 2026 10:10 AM

ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में एक बड़ा संकेत देखने को मिला है। गोल्ड और चांदी में तेज गिरावट के बीच अमेरिकी डॉलर ने अचानक जबरदस्त मजबूती दिखाई है। डॉलर इंडेक्स करीब 0.9% उछलकर 97 के स्तर पर पहुंच गया, जिसे जुलाई के बाद डॉलर की सबसे बड़ी एक-दिन की...
बिजनेस डेस्कः ग्लोबल फाइनेंशियल मार्केट में एक बड़ा संकेत देखने को मिला है। गोल्ड और चांदी में तेज गिरावट के बीच अमेरिकी डॉलर ने अचानक जबरदस्त मजबूती दिखाई है। डॉलर इंडेक्स करीब 0.9% उछलकर 97 के स्तर पर पहुंच गया, जिसे जुलाई के बाद डॉलर की सबसे बड़ी एक-दिन की तेजी माना जा रहा है।
इस उछाल ने ग्लोबल करेंसी और कमोडिटी बाजार दोनों को चौंका दिया। खास बात यह रही कि डॉलर की यह मजबूती ठीक उसी समय सामने आई, जब गोल्ड और चांदी में भारी बिकवाली देखी गई। विशेष रूप से चांदी में आई तेज गिरावट ने पूरे बाजार का सेंटीमेंट बदल दिया।
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब गोल्ड और चांदी जैसी कीमती धातुओं में कमजोरी आती है, तो उन देशों की करेंसी पर दबाव बढ़ जाता है जिनकी अर्थव्यवस्था कमोडिटी एक्सपोर्ट पर ज्यादा निर्भर होती है। इन्हें आम तौर पर कमोडिटी करेंसी कहा जाता है। गोल्ड-सिल्वर में गिरावट के साथ ही इन करेंसी में कमजोरी आई और निवेशकों का रुझान डॉलर की ओर बढ़ गया।
हालांकि, डॉलर की इस तेजी के पीछे सिर्फ कमोडिटी बाजार की कमजोरी ही वजह नहीं मानी जा रही है। इस रैली को और मजबूती तब मिली, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के अगले प्रमुख के तौर पर केविन वॉर्श के नाम का ऐलान किया। मार्केट में केविन वॉर्श को एक ऐसे पॉलिसी मेकर के तौर पर देखा जाता है, जिन्हें डॉलर के अनुकूल माना जाता है। यही वजह है कि इस खबर के सामने आते ही निवेशकों का भरोसा डॉलर में और मजबूत हो गया, जिससे डॉलर इंडेक्स में खरीदारी तेज हो गई।
जानकारों का कहना है कि जब डॉलर मजबूत होता है, तो आमतौर पर गोल्ड और चांदी जैसी कमोडिटी पर दबाव बनता है। इसकी वजह यह है कि इन धातुओं की कीमतें डॉलर में तय होती हैं। डॉलर महंगा होने पर दूसरी करेंसी में निवेश करने वालों के लिए गोल्ड और चांदी महंगी हो जाती हैं, जिससे मांग प्रभावित होती है। इस बार भी यही पैटर्न देखने को मिला।
फेडरल रिजर्व के नेतृत्व को लेकर बदले माहौल ने बॉन्ड और करेंसी मार्केट दोनों में हलचल बढ़ा दी है। निवेशक यह मान रहे हैं कि आने वाले समय में अमेरिकी मौद्रिक नीति ज्यादा सख्त या डॉलर के पक्ष में रह सकती है। भारतीय निवेशकों के लिए भी यह घटनाक्रम अहम है, क्योंकि डॉलर की मजबूती का असर सीधे तौर पर रुपए, कमोडिटी कीमतों और विदेशी निवेश प्रवाह पर पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में, जब गोल्ड और चांदी में पहले से ही तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है।
कुल मिलाकर, गोल्ड-चांदी की कमजोरी और फेड चेयर को लेकर आए राजनीतिक संकेतों ने मिलकर डॉलर को मजबूत सहारा दिया है, जिसके चलते जुलाई के बाद पहली बार डॉलर ने इतनी बड़ी एक-दिन की छलांग लगाई है।