Major Drop in Gold: सोने की चीमक पड़ी फीकी, रिकॉर्ड हाई से 27% टूटा गोल्ड, जानें क्या है एक्सपर्ट्स की राय?

Edited By Updated: 22 Jun, 2026 11:36 AM

gold s shine has faded metal has slumped 27 from its high

साल 2025 में 65% की शानदार तेजी दिखाने वाला सोना 2026 में अब तक निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। पहली छमाही में सोने की कीमतों में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी 2026 के अंत में सोना 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर...

बिजनेस डेस्कः साल 2025 में 65% की शानदार तेजी दिखाने वाला सोना 2026 में अब तक निवेशकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया है। पहली छमाही में सोने की कीमतों में करीब 4% की गिरावट दर्ज की गई है। जनवरी 2026 के अंत में सोना 5,602 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था, लेकिन इसके बाद बाजार की दिशा बदल गई और कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली।

रिकॉर्ड स्तर से फिसला सोना

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और निवेशकों की मुनाफावसूली के चलते सोने में तेज गिरावट आई। जून में इसका भाव करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस तक फिसल गया। यह अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 27% नीचे था। फिलहाल सोना करीब 4,214 डॉलर प्रति औंस के आसपास बना हुआ है।

अमेरिका-ईरान समझौते पर बाजार की नजर

बाजार की नजरें इस समय अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते पर टिकी हुई हैं। होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल बाजार को राहत मिली है और कीमतों में करीब 15% की गिरावट आई है। हालांकि निवेशक अभी भी इस बात के लेकर सतर्क हैं कि यह समझौता कितने समय तक टिकेगा और क्षेत्र में तनाव कितना कम होगा। या नहीं।

तेल सस्ता, क्यों नहीं बढ़ रहा सोना?

आमतौर पर भू-राजनीतिक तनाव कम होने और तेल सस्ता होने से सोने को सहारा मिलता है, लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। फिलहाल सोने की चाल तेल नहीं, बल्कि अमेरिकी ब्याज दरें तय कर रही हैं।

सोने की कीमत पर एक साथ कई चीजें असर डालती हैं। इनमें महंगाई, ब्याज दरें, डॉलर और वैश्विक घटनाक्रम शामिल हैं। इस समय सबसे ज्यादा असर ब्याज दरों का दिख रहा है।

फेडरल रिजर्व की सख्ती बनी बड़ी वजह

17 जून को हुई अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के बाद संकेत मिले कि 2026 में कम से कम एक बार और ब्याज दरों में बढ़ोतरी संभव है। फेड चेयरमैन केविन वॉर्श ने भी साफ किया कि महंगाई को काबू में रखना उनकी प्राथमिकता है। इससे ब्याज दरों में जल्द कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ गई है।

ऊंची ब्याज दरें सोने के लिए अच्छी खबर नहीं मानी जातीं। वजह यह है कि सोना कोई ब्याज नहीं देता। ऐसे में निवेशकों का रुझान दूसरे विकल्पों की तरफ बढ़ सकता है।

एक्सपर्ट्स की गोल्ड पर राय

कमोडिटी बाजार के जानकारों का मानना है कि अमेरिकी फेड के सख्त रुख और मजबूत डॉलर ने सोने पर दबाव बढ़ाया है। इसके अलावा, हालिया तेजी के बाद निवेशकों द्वारा की गई मुनाफावसूली ने भी कीमतों में गिरावट को तेज किया है। विशेषज्ञ अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि इससे कीमती धातुओं में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है।

क्या फिर लौटेगी तेजी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले महीनों में महंगाई नियंत्रित होती है और फेड ब्याज दरों में कटौती की दिशा में कदम बढ़ाता है, तो सोने में फिर से तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है, तब भी सोना निवेशकों के लिए सुरक्षित निवेश विकल्प बना रह सकता है।
 

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