Edited By jyoti choudhary,Updated: 21 Mar, 2026 11:41 AM

वैश्विक संकट के समय आमतौर पर सोने की चमक बढ़ जाती है, क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। ईरान में जारी संघर्ष के बावजूद सोना कमजोर प्रदर्शन कर रहा है और छह साल के सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़...
बिजनेस डेस्कः वैश्विक संकट के समय आमतौर पर सोने की चमक बढ़ जाती है, क्योंकि इसे सुरक्षित निवेश माना जाता है लेकिन इस बार हालात कुछ अलग नजर आ रहे हैं। ईरान में जारी संघर्ष के बावजूद सोना कमजोर प्रदर्शन कर रहा है और छह साल के सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है।
मार्च 2020 के बाद सबसे खराब वीकली परफॉर्मेंस
सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन सोने की कीमतों में ज्यादा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में यह करीब 4,660 डॉलर प्रति औंस पर बना रहा। हालांकि पूरे हफ्ते में इसकी कीमत में करीब 7 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। यह मार्च 2020 के बाद सोने का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन है।
निवेशक बना रहे सोने से दूरी
विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान में तनाव के कारण तेल और गैस की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका बनी हुई है। इसी वजह से ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कम हो गई है और निवेशक सोने से दूरी बना रहे हैं। 28 फरवरी को ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बाद से हर हफ्ते सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली है। इस दौरान अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर मजबूत हुए हैं, जिससे सोने पर दबाव बढ़ा है।
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, निवेशक सोने से पैसा निकालकर अन्य विकल्पों में निवेश कर रहे हैं। गोल्ड आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) से भी लगातार निकासी हो रही है। इस साल की शुरुआत में जो अतिरिक्त निवेश हुआ था, वह अब लगभग पूरी तरह निकल चुका है। वहीं, अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दरों को स्थिर रखा है और संकेत दिया है कि महंगाई नियंत्रित होने के बाद ही दरों में कटौती पर विचार होगा।
इतिहास पर नजर डालें तो ऐसा ही ट्रेंड 2022 में भी देखने को मिला था, जब रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद तेल की कीमतों में उछाल आया था और सोने की कीमतों में लंबी गिरावट का दौर चला था। उस समय लगातार सात महीनों तक सोना कमजोर रहा, जो इसके इतिहास की सबसे लंबी गिरावट मानी जाती है।
फिर बढ़ सकती है सोने की मांग
हालांकि हालिया गिरावट के बावजूद इस साल अब तक सोने की कीमतों में करीब 8 फीसदी की बढ़त बनी हुई है। जनवरी के अंत में सोना 5,600 डॉलर प्रति औंस के करीब पहुंच गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान में संघर्ष लंबा खिंचता है, तो बाजार का फोकस महंगाई से हटकर आर्थिक मंदी के जोखिम पर जा सकता है। ऐसे में सोने की मांग फिर बढ़ सकती है और इसकी कीमतों में दोबारा तेजी देखने को मिल सकती है।