Edited By jyoti choudhary,Updated: 23 Feb, 2026 05:51 PM

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) ने 590 करोड़ रुपए के हालिया फ्रॉड मामले के बाद खातों से अनधिकृत निकासी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। बैंक ने घोषणा की है कि अब तय सीमा से अधिक हर बड़े ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहक की अनिवार्य डिजिटल स्वीकृति ली...
बिजनेस डेस्कः आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) ने 590 करोड़ रुपए के हालिया फ्रॉड मामले के बाद खातों से अनधिकृत निकासी रोकने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। बैंक ने घोषणा की है कि अब तय सीमा से अधिक हर बड़े ट्रांजैक्शन के लिए ग्राहक की अनिवार्य डिजिटल स्वीकृति ली जाएगी।
कैसे काम करेगा नया सिस्टम?
एनालिस्ट्स के साथ कॉन्फ्रेंस कॉल में बैंक के CEO वी. वैद्यनाथन ने बताया कि अब केवल फोन कॉल के आधार पर हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन को मंजूरी नहीं दी जाएगी। ग्राहक को बैंक के आधिकारिक मोबाइल ऐप में लॉग-इन कर स्पष्ट डिजिटल कन्फर्मेशन देना होगा।
यह पुष्टि एक सत्यापित डिजिटल चैनल के जरिए निर्धारित समय सीमा में दर्ज करनी होगी। बैंक के अनुसार, यह अतिरिक्त सुरक्षा परत अनधिकृत डेबिट के जोखिम को काफी हद तक कम करेगी।
AI और मानव जांच दोनों साथ
बैंक ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम लागू करने की भी घोषणा की है। यह सिस्टम सिग्नेचर वेरिफिकेशन और संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करेगा।
AI द्वारा प्राथमिक जांच के बाद मामलों की मानवीय स्तर पर भी समीक्षा की जाएगी। वैद्यनाथन ने कहा कि हालिया घटना से सीख लेते हुए बैंक अपनी आंतरिक प्रक्रियाओं को और सुदृढ़ कर रहा है।
590 करोड़ रुपए का फ्रॉड
वीकेंड में बैंक ने खुलासा किया था कि चंडीगढ़ शाखा से जुड़े हरियाणा सरकार के खातों में करीब 590 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी सामने आई है। इस घटनाक्रम के बाद हरियाणा सरकार ने बैंक को अपने पैनल से हटा दिया, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 200 करोड़ रुपए का फंड आउटफ्लो हुआ।
मामले की जांच शुरू कर दी गई है। चार अधिकारियों को निलंबित किया गया है। केस को बोर्ड की विशेष समिति के समक्ष रखा गया है और स्वतंत्र फोरेंसिक ऑडिट के लिए KPMG को नियुक्त किया गया है।