Edited By jyoti choudhary,Updated: 21 Mar, 2026 04:01 PM

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) को आयकर विभाग की ओर से ₹6,338 करोड़ का भारी-भरकम टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। SBI ने 20 मार्च को इसकी जानकारी एक्सचेंज के साथ शेयर की, जिसके बाद वित्तीय जगत में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, यह पूरा...
बिजनेस डेस्कः देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक State Bank of India (SBI) को आयकर विभाग की ओर से ₹6,338 करोड़ का भारी-भरकम टैक्स डिमांड नोटिस मिला है। SBI ने 20 मार्च को इसकी जानकारी एक्सचेंज के साथ शेयर की, जिसके बाद वित्तीय जगत में हलचल तेज हो गई है। दरअसल, यह पूरा मामला वित्त वर्ष 2023-24 (असेसमेंट ईयर) के टैक्स आकलन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
स्क्रूटनी में खारिज हुए दावे, बढ़ी देनदारी
बैंक की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आयकर विभाग ने हाल ही में बैंक के खातों की विस्तृत जांच (स्क्रूटनी) की थी। इस दौरान अधिकारियों ने कुछ खर्चों और दावों को स्वीकार नहीं किया, जिसे ‘डिसअलाउंस (disallowance)’ कहा जाता है।
इन्हीं खारिज दावों और उन पर लगे ब्याज को मिलाकर कुल देनदारी ₹6,338 करोड़ तक पहुंच गई है। यह आदेश 19 मार्च 2026 को आयकर अधिनियम की विभिन्न धाराओं—143(3), 144C(3) और 144B—के तहत जारी किया गया।
यह भी पढ़ें: Credit Card Closed: क्रेडिट कार्ड बंद, 10 साल बाद ₹33.83 लाख का बिल, कोर्ट ने बैंक को लगाई फटकार
पुराना विवाद, नई कार्रवाई नहीं
बैंक प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि यह मामला कोई नई गड़बड़ी नहीं है। टैक्स से जुड़े ऐसे कई मुद्दे पिछले कुछ वर्षों से कानूनी प्रक्रिया में हैं और यह नोटिस भी उसी लंबी विवाद श्रृंखला का हिस्सा है। बड़ी रकम होने के कारण और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बैंक ने इस जानकारी को सार्वजनिक किया है।
ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा असर
SBI ने अपने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि इस टैक्स नोटिस का उसके रोजमर्रा के कामकाज या सेवाओं पर कोई असर नहीं पड़ेगा। बैंक की सभी गतिविधियां पहले की तरह सामान्य रूप से जारी रहेंगी।
यह भी पढ़ें: Gold Crash: गोल्ड मार्केट में उथल-पुथल, 1983 के बाद सबसे खराब सप्ताह, विशेषज्ञों ने दी निवेशकों को ये सलाह
कानूनी चुनौती देगा बैंक
बैंक ने यह भी साफ किया है कि वह इस आदेश को चुनौती देगा। SBI संबंधित अपीलीय अधिकारियों के समक्ष तय समयसीमा के भीतर अपील दायर करेगा और कानूनी रास्ता अपनाएगा।
कुल मिलाकर, यह मामला फिलहाल बैंक और आयकर विभाग के बीच चल रहे पुराने टैक्स विवाद का हिस्सा है, जिसका अंतिम फैसला अब कानूनी प्रक्रिया के जरिए होगा।