रेपो रेट को लेकर अहम खबर, बड़ा कदम उठाने की तैयारी में RBI

Edited By Updated: 05 May, 2025 11:10 AM

important news regarding repo rate rbi is preparing to take a big step

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वित्त वर्ष 2025-26 में रेपो रेट में 125-50 बेसिस प्वाइंट (1.25%-1.50%) तक की कटौती कर सकता है। SBI की नई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 तक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 3.34% तक आ सकती है, जो पिछले 67...

बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) वित्त वर्ष 2025-26 में रेपो रेट में 125-50 बेसिस प्वाइंट (1.25%-1.50%) तक की कटौती कर सकता है। SBI की नई रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 तक उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 3.34% तक आ सकती है, जो पिछले 67 महीनों में सबसे निचला स्तर होगा। यह परिदृश्य आरबीआई को ब्याज दरों में आक्रामक कटौती की अनुमति देता है।

रेपो रेट में कटौती का अनुमान

  • फरवरी और अप्रैल 2025 में पहले ही 0.50% कटौती हो चुकी है।
  • जून और अगस्त 2025 में 75 बेसिस प्वाइंट की और कटौती संभव है।
  • H2FY26 (अक्टूबर 2025-मार्च 2026) में अतिरिक्त 0.50% की कटौती की संभावना जताई गई है।
  • मार्च 2026 तक रेपो रेट 5.00%–5.25% तक आ सकता है, जो RBI के न्यूट्रल रेट 5.65% से भी नीचे होगा।

महंगाई दर का ट्रेंड

Q1FY26 (अप्रैल-जून) में महंगाई दर 3% से नीचे रहने की उम्मीद है। FY26 में औसत CPI 3.7-3.8% रह सकती है, यदि खाद्य कीमतों में कोई बड़ा झटका नहीं आता।

बैंकों की डिपॉजिट दरों पर असर

  • ब्याज दरों में संभावित कटौती से फिक्स्ड डिपॉजिट दरें करीब 1% तक घट सकती हैं।
  • जमा की तुलना में क्रेडिट ग्रोथ तेज रहने से बैंकिंग सेक्टर का क्रेडिट-डिपॉजिट अंतर बढ़ेगा और NIMs (नेट इंटरेस्ट मार्जिन) पर दबाव आ सकता है।

RBI की OMO और डिविडेंड नीति

  • अप्रैल-मई 2025 में RBI ने ₹2.45 लाख करोड़ के ओपन मार्केट ऑपरेशन्स (OMO) किए या करने की योजना है।
  • FY25 में RBI 2.18 लाख करोड़ रुपए का डिविडेंड सरकार को दे सकता है।

रुपया बनाम डॉलर का अनुमान

  • 2025 में रुपया ₹85-₹87 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है।
  • अमेरिकी महंगाई में कमी और आयात टैरिफ से डॉलर पर दबाव पड़ सकता है।

फेडरल रिजर्व की नीति

  • मार्च 2025 में अमेरिका की CPI 2.4% रही।
  • फेड की ओर से आगामी दो सत्रों में ब्याज दरें स्थिर रखने की संभावना है।

SBI की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महंगाई दर नियंत्रण में है, आर्थिक वृद्धि स्थिर बनी हुई है और वैश्विक अनिश्चितता के बीच RBI प्रमुख ब्याज दरों में बड़ी कटौती की दिशा में आगे बढ़ सकता है। इससे जहां कर्ज लेना सस्ता हो सकता है, वहीं बैंक जमा पर मिलने वाला ब्याज भी कम हो सकता है।

 

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