बैंक डिविडेंड को लेकर RBI का बड़ा और चौंकाने वाला फैसला, जानें क्या है नए नियम

Edited By Updated: 07 Jan, 2026 11:59 AM

rbi makes a major and surprising decision regarding bank dividends

भारतीय बैंकिंग सिस्टम को और अधिक सुरक्षित व स्थिर बनाने की दिशा में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों द्वारा शेयरधारकों को दिए जाने वाले डिविडेंड भुगतान को लेकर नए और सख्त ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों...

बिजनेस डेस्कः भारतीय बैंकिंग सिस्टम को और अधिक सुरक्षित व स्थिर बनाने की दिशा में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय बैंक ने बैंकों द्वारा शेयरधारकों को दिए जाने वाले डिविडेंड भुगतान को लेकर नए और सख्त ड्राफ्ट नियम जारी किए हैं। इन नियमों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बैंक मुनाफा बांटने से पहले अपनी पूंजी स्थिति और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता को मजबूत करें।

आरबीआई चाहता है कि बैंक पूरे मुनाफे को डिविडेंड के रूप में बांटने के बजाय उसका एक हिस्सा भविष्य के जोखिमों और अनिश्चितताओं के लिए सुरक्षित रखें। यह नियम SBI सहित सभी वाणिज्यिक बैंकों और भारत में काम कर रहे विदेशी बैंकों पर लागू होंगे। हालांकि, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs), स्मॉल फाइनेंस बैंक और पेमेंट बैंक फिलहाल इसके दायरे से बाहर रखे गए हैं।

निवेशकों को झटका लेकिन सिस्टम होगा मजबूत

नए नियमों का असर अल्पकाल में निवेशकों पर पड़ सकता है, क्योंकि इससे बैंकों द्वारा दिए जाने वाले डिविडेंड की राशि घट सकती है लेकिन लंबी अवधि में यह कदम बैंकिंग सेक्टर को अधिक सुरक्षित बनाएगा, जिससे जमाकर्ताओं का भरोसा बढ़ेगा और बैंक किसी भी आर्थिक झटके का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे।

FY27 से लागू होगा नया फ्रेमवर्क

आरबीआई का यह प्रस्तावित और एक समान ‘प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क’ वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) से लागू होगा। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष में भारतीय बैंकों ने रिकॉर्ड मुनाफा कमाया था और अपने शेयरहोल्डर्स को 75,000 करोड़ रुपए से अधिक का डिविडेंड बांटा था। आगे चलकर इतनी बड़ी राशि का भुगतान वही बैंक कर पाएंगे, जो आरबीआई की कड़ी शर्तों पर खरे उतरेंगे।

पूंजी और एसेट क्वालिटी से जुड़ा डिविडेंड

नए नियमों के तहत, डिविडेंड देने की अनुमति बैंक की कैपिटल एडिक्वेसी और मुनाफे की गुणवत्ता से सीधे तौर पर जुड़ी होगी। ड्राफ्ट के अनुसार, बैंक तभी डिविडेंड घोषित कर सकेंगे जब वे न्यूनतम नियामकीय पूंजी आवश्यकताओं और जरूरी बफर्स को पूरा करेंगे। घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंकों (D-SIBs) के लिए अतिरिक्त पूंजी बफर बनाए रखना अनिवार्य होगा। सबसे अहम शर्त यह है कि डिविडेंड भुगतान के बाद भी बैंक का पूंजी अनुपात तय सीमा से नीचे नहीं जाना चाहिए।

मुनाफे की गणना के नियम भी सख्त

आरबीआई ने मुनाफे की गणना को भी ज्यादा पारदर्शी बना दिया है। अब बैंकों को डिविडेंड प्रस्तावित करने के लिए ‘समायोजित कर पश्चात लाभ’ (Adjusted PAT) दिखाना होगा। इसके लिए कुल PAT में से नेट एनपीए (Net NPA) की राशि घटानी होगी। अगर यह आंकड़ा सकारात्मक रहता है, तभी बैंक डिविडेंड देने के पात्र होंगे। भारत में शाखा के रूप में काम कर रहे विदेशी बैंकों को भी संबंधित अवधि में सकारात्मक शुद्ध लाभ दिखाना होगा, तभी वे अपने मुख्य देश में मुनाफा भेज सकेंगे।

नियम तोड़े तो नहीं मिलेगी राहत

आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि इन पात्रता शर्तों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी। जो बैंक शर्तों को पूरा नहीं करेंगे, वे न तो डिविडेंड घोषित कर पाएंगे और न ही मुनाफा विदेश भेज सकेंगे। इसके अलावा, यदि कोई बैंक बैंकिंग कानूनों या आरबीआई के निर्देशों का उल्लंघन करता है, तो केंद्रीय बैंक को डिविडेंड पर रोक लगाने और प्रतिबंध लगाने का पूरा अधिकार होगा। 

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