Edited By jyoti choudhary,Updated: 06 Jan, 2026 04:32 PM

देश के बैंकिंग सेक्टर में बीते कुछ वर्षों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। जहां एक ओर कई बैंकों का मर्जर हुआ, वहीं दूसरी ओर कुछ बैंक इतने बड़े हो गए कि वे देश के बड़े कॉरपोरेट ग्रुप्स को टक्कर देने लगे। इसी बीच स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) की एंट्री...
बिजनेस डेस्कः देश के बैंकिंग सेक्टर में बीते कुछ वर्षों में बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। जहां एक ओर कई बैंकों का मर्जर हुआ, वहीं दूसरी ओर कुछ बैंक इतने बड़े हो गए कि वे देश के बड़े कॉरपोरेट ग्रुप्स को टक्कर देने लगे। इसी बीच स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) की एंट्री ने बैंकिंग इंडस्ट्री का समीकरण ही बदल दिया है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़े बताते हैं कि स्मॉल फाइनेंस बैंक अब सिर्फ छोटे खिलाड़ी नहीं रहे, बल्कि रोजगार सृजन के मामले में बड़े बैंकों से कहीं आगे निकल चुके हैं। वित्त वर्ष 2025 में SFBs ने भर्ती के मामले में पिछले पांच साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जबकि बड़े प्राइवेट बैंकों में कर्मचारियों की संख्या घटती नजर आई।
स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने दी सबसे ज्यादा नौकरियां
RBI के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 में स्मॉल फाइनेंस बैंकों ने कुल 26,736 नई भर्तियां कीं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे ज्यादा हैं। इसके उलट, प्राइवेट सेक्टर के बड़े बैंकों ने भर्ती की रफ्तार धीमी कर दी। वित्त वर्ष 2022 से 2024 तक हर साल 75,000 से 1 लाख कर्मचारियों की भर्ती करने वाले प्राइवेट बैंकों में FY25 के दौरान कर्मचारियों की संख्या 7,257 घट गई। इसी वजह से FY25 में स्मॉल फाइनेंस बैंक बैंकिंग सेक्टर के सबसे बड़े जॉब क्रिएटर बनकर उभरे।
लोन और डिपॉजिट में जबरदस्त ग्रोथ
हालांकि कुल बैंकिंग सिस्टम में स्मॉल फाइनेंस बैंकों की हिस्सेदारी अभी 1 फीसदी से थोड़ी ज्यादा है, लेकिन इसके बावजूद उनकी ग्रोथ काबिले-तारीफ रही है। वित्त वर्ष 2020 से 2025 के बीच SFBs के लोन में करीब 25 फीसदी और डिपॉजिट में लगभग 34 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं, पूरे बैंकिंग सिस्टम में लोन और डिपॉजिट की सालाना ग्रोथ सिर्फ 11–13 फीसदी रही।
भर्ती में तेजी की क्या है वजह?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्मॉल फाइनेंस बैंकों में आक्रामक भर्ती की मुख्य वजह उनकी तेज विस्तार योजनाएं हैं। ये बैंक अपनी बैलेंस शीट बढ़ाने और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं।
कैपिटल स्मॉल फाइनेंस बैंक के एमडी और सीईओ सर्वजीत सिंह समरा ने कहा कि SFBs में भर्ती की यह रफ्तार साइकलिक नहीं, बल्कि स्ट्रक्चरल है। उन्होंने बताया कि असेट क्वालिटी, गवर्नेंस और देनदारी प्रोफाइल मजबूत होने के बाद ये बैंक अब सब-अर्बन और ग्रामीण इलाकों में तेजी से शाखाएं खोल रहे हैं।
5 साल में दोगुनी हुई कर्मचारियों की संख्या
स्मॉल फाइनेंस बैंकों में कर्मचारियों की संख्या FY20 में 95,249 थी, जो FY25 में बढ़कर करीब 1.8 लाख हो गई। इस दौरान SFBs में सालाना औसतन 13.3 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं, पूरे बैंकिंग सिस्टम में कर्मचारियों की संख्या की ग्रोथ सिर्फ 4.3 फीसदी रही और सरकारी बैंकों में तो कर्मचारियों की संख्या में 0.8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। फिलहाल देश में कुल बैंक कर्मचारियों की संख्या 18.1 लाख तक पहुंच चुकी है।
यूनिवर्सल बैंकिंग की ओर बढ़ते SFBs
कई स्मॉल फाइनेंस बैंक अब यूनिवर्सल बैंक बनने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसी वजह से वे रेगुलेटरी मंजूरी से पहले ही अपने ऑपरेशन का विस्तार कर रहे हैं। हाल ही में RBI ने AU स्मॉल फाइनेंस बैंक को यूनिवर्सल बैंक में बदलने की मंजूरी दी है। इसके अलावा उज्जिवन स्मॉल फाइनेंस बैंक, जना स्मॉल फाइनेंस बैंक और इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक भी यूनिवर्सल बैंकिंग लाइसेंस के लिए प्रयासरत हैं।