Trump Tariff से घबराए भारतीय बैंक, निर्यातकों को कर्ज देने में सतर्क, पैसा डूबने का खतरा

Edited By Updated: 11 Aug, 2025 05:04 PM

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अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ दोगुना करने के फैसले के बाद भारतीय बैंक निर्यातकों को कर्ज देने को लेकर सतर्क हो गए हैं। बैंक अब निर्यातकों के नए लोन आवेदनों की कड़ी जांच कर रहे हैं। बैंक खासतौर पर यह देख रहे हैं कि निर्यातकों की अमेरिकी...

बिजनेस डेस्कः अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ दोगुना करने के फैसले के बाद भारतीय बैंक निर्यातकों को कर्ज देने को लेकर सतर्क हो गए हैं। बैंक अब निर्यातकों के नए लोन आवेदनों की कड़ी जांच कर रहे हैं। बैंक खासतौर पर यह देख रहे हैं कि निर्यातकों की अमेरिकी बाजार में हिस्सेदारी कितनी है और व्यापार जारी रखने की उनकी योजना क्या है। इस सख्ती के पीछे बैंक की चिंता है कि टैरिफ बढ़ने से निर्यातकों की वित्तीय स्थिति कमजोर हो सकती है और कर्ज डूबने का खतरा बढ़ सकता है। निर्यातक भी इस स्थिति से प्रभावित होकर नए व्यापारिक रणनीतियों पर काम कर रहे हैं, ताकि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें। 

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, देश के पांच बड़े बैंकों के अधिकारी अब कपड़ा, रत्न और आभूषण उद्योग के निर्यातकों की वित्तीय स्थिति की गहन समीक्षा कर रहे हैं। नए एक्सपोर्ट फाइनेंसिंग प्रपोजल या रिन्यूअल के दौरान उधारकर्ताओं से विस्तृत सवाल किए जा रहे हैं। कई निर्यात ऑर्डर होल्ड पर हैं, क्योंकि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता जारी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारतीय उत्पादों पर टैरिफ को दोगुना कर 50% तक कर दिया है। इस फैसले का असर खासकर श्रम-प्रधान उद्योगों पर पड़ा है, जो पहले ही वैश्विक प्रतिस्पर्धा से जूझ रहे हैं।

बैंकों की चिंता

  • बैंक आशंकित हैं कि यह स्थिति उनकी बैलेंस शीट पर दबाव बढ़ा सकती है, जैसा कि कुछ साल पहले डूबे कर्जों के दौर में हुआ था।
  • अब वे आंतरिक रूप से मूल्यांकन कर रहे हैं कि किन क्लाइंट्स की आय अमेरिका पर सबसे अधिक निर्भर है।

निर्यातकों की रणनीति

  • कुछ कंपनियां अमेरिकी टैक्स से बचने के लिए उत्पादन को भारत से बाहर शिफ्ट करने, नए बाजारों में विस्तार करने और अमेरिका में अधिग्रहण करने पर विचार कर रही हैं।
  • बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा के चलते दीर्घकालिक नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है।

सरकारी रुख

वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने संसद में कहा कि सरकार निर्यातकों से बातचीत कर रही है और “राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएगी।” रत्न और आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद (GJEPC) ने ब्याज राहत, ड्यूटी ड्रॉबैक और वर्किंग कैपिटल पर ब्याज स्थगन जैसे उपायों की मांग की है।

भविष्य की चुनौतियां

रेटिंग एजेंसियों ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है लेकिन कंपनियों को डर है कि रेटिंग में गिरावट से कर्ज लेने की लागत बढ़ जाएगी। निर्यातकों ने सरकार से कोविड-काल जैसी आपात राहत नीति और कच्चे माल पर आयात शुल्क हटाने की मांग की है।

अमेरिका-भारत व्यापार विवाद के इस दौर में बैंक और सरकार दोनों के सामने यह बड़ी चुनौती है कि वे निर्यातकों को वित्तीय सुरक्षा और प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त कैसे दिलाएं।


 

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