Edited By jyoti choudhary,Updated: 03 Apr, 2026 11:58 AM

देश के बैंकिंग सिस्टम पर एक और बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने कई खाते बिना मोबाइल...
बिजनेस डेस्कः देश के बैंकिंग सिस्टम पर एक और बड़ा सवाल खड़ा हुआ है। देश के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट में इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक (IPPB) की कार्यप्रणाली में गंभीर खामियां उजागर हुई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ने कई खाते बिना मोबाइल नंबर वेरिफिकेशन के खोल दिए और कई ग्राहकों की जानकारी एक ही मोबाइल नंबर से लिंक कर दी, जो डेटा सुरक्षा और सिस्टम की बड़ी कमजोरी को दर्शाता है।
निष्क्रिय खातों और सेवाओं में कमी
ऑडिट में सामने आया कि आईपीपीबी के बड़ी संख्या में खाते निष्क्रिय या कम इस्तेमाल वाले हैं। साथ ही, ग्राहकों तक घर-घर बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने की योजना भी अपेक्षित स्तर तक सफल नहीं हो पाई। कई अनुरोध लंबित रहे या समय पर निपटाए नहीं गए।
नियमों को नजरअंदाज कर विस्तार
रिपोर्ट में कहा गया है कि IPPB ने तेजी से नेटवर्क और ग्राहक आधार तो बढ़ाया लेकिन इस दौरान संचालन और नियामकीय नियमों की अनदेखी हुई। इससे वित्तीय समावेशन का उद्देश्य भी प्रभावित हुआ और ग्राहकों की निजी जानकारी पर जोखिम बढ़ गया।
UPI सेवाओं में भी कमजोर प्रदर्शन
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) के आंकड़ों के अनुसार, IPPB की UPI सेवाओं में तकनीकी खामियां भी सामने आईं। बैंक का तकनीकी अस्वीकृति दर 2021-22 में 3.29% और 2022-23 में 7.82% रही, जो Reserve Bank of India (RBI) के 1% से कम के लक्ष्य से काफी ज्यादा है।
वित्त वर्ष 2023-24 में IPPB की UPI सेवाएं कुल 362 घंटे तक बाधित रहीं, जो अन्य पेमेंट बैंकों की तुलना में काफी अधिक है।
CAG की सिफारिश
CAG ने सुझाव दिया है कि बैंक को निगरानी तंत्र मजबूत करना चाहिए और UPI सेवाओं में सुधार लाने के लिए प्रभावी सिस्टम लागू करना चाहिए। रिपोर्ट के बाद यह माना जा रहा है कि RBI इस मामले में सख्त कार्रवाई कर सकता है, ताकि ग्राहकों का भरोसा बरकरार रखा जा सके।