Nomura cuts Nifty target: निफ्टी टारगेट में बड़ी कटौती, 29,300 से सीधे 24,900 पर लाया अनुमान

Edited By Updated: 16 Mar, 2026 11:14 AM

massive cut to nifty target estimate slashed from 29 300 directly to 24 900

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के असर से भारतीय शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत के शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप लगभग 447 अरब डॉलर घटकर 4.7 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर रह गया है। इससे...

बिजनेस डेस्कः ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध के असर से भारतीय शेयर बाजारों में तेज गिरावट देखने को मिली है। पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत के शेयर बाजार का कुल मार्केट कैप लगभग 447 अरब डॉलर घटकर 4.7 लाख करोड़ (ट्रिलियन) डॉलर रह गया है। इससे पहले इतनी बड़ी गिरावट मार्च 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान देखी गई थी।

वैश्विक स्तर पर भी बाजारों में भारी बिकवाली का माहौल है। दुनिया भर के शेयर बाजारों का कुल मार्केट कैप 8.5 ट्रिलियन डॉलर से अधिक घटकर 148.9 ट्रिलियन डॉलर पर आ गया है। निवेशकों को डर है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव वैश्विक आर्थिक विकास को धीमा कर सकता है और ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है।

नोमुरा ने की निफ्टी टारगेट में बड़ी कटौती

इसी बीच जापान की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने भारतीय बाजार को लेकर अपना अनुमान घटा दिया है। ब्रोकरेज ने दिसंबर 2026 के लिए Nifty-50 का टारगेट 15% घटाकर 24,900 कर दिया है, जो पहले 29,300 था। रिपोर्ट में कहा गया है कि मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के कारण कंपनियों की कमाई के अनुमान पर दबाव बढ़ गया है।

नोमुरा के मुताबिक अगर कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो वित्त वर्ष 2026-27 में कंपनियों की कमाई में 10-15% तक गिरावट का जोखिम है। ब्रोकरेज ने बाजार के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो का अनुमान भी 21 गुना से घटाकर 18.5 गुना कर दिया है।

दो हफ्तों में 8% टूटा बाजार

पिछले दो हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार में करीब 8% की गिरावट दर्ज की गई है। निफ्टी और निफ्टी बैंक अपने रिकॉर्ड हाई से लगभग 13% नीचे आ चुके हैं। इससे पहले ऐसी गिरावट केवल दो बार देखी गई थी- 2020 में कोविड-19 संकट के दौरान और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के समय।

पिछले हफ्ते (9 मार्च–13 मार्च) में Sensex और Nifty ने कई वर्षों की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज की। इसकी बड़ी वजह मिडिल ईस्ट में युद्ध और कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बने रहना है। महंगा कच्चा तेल भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए महंगाई और आर्थिक वृद्धि दोनों पर दबाव बढ़ा सकता है।

आगे क्या?

ब्रोकरेज रिपोर्ट के मुताबिक निकट भविष्य में बाजार में करीब 5% और गिरावट संभव है, खासकर स्मॉल और मिडकैप शेयरों में ज्यादा जोखिम दिखाई दे रहा है। अगर विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) बिकवाली जारी रखते हैं तो बाजार पर और दबाव पड़ सकता है।

हालांकि ब्रोकरेज का मानना है कि यदि बाजार मौजूदा स्तर से 5% से ज्यादा गिरता है, तो यह लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए खरीदारी का मौका बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यूटिलिटी, कोयला, तेल उत्पादक कंपनियां, हेल्थकेयर, फार्मा, कंज्यूमर स्टेपल्स और टेलीकॉम सेक्टर अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
 

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