Gold Price को लेकर Morgan Stanley का अनुमान, कीमतों में आएगा बंपर उछाल

Edited By Updated: 10 Jan, 2026 03:29 PM

morgan stanley s forecast for gold prices a massive surge is expected

साल 2026 की शुरुआत सोने ने ऐतिहासिक तेजी के साथ की है। 2025 के आखिर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहली बार सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस यानी 31.1035 ग्राम (करीब 3.74 लाख रुपए) के पार पहुंचा। 7 जनवरी 2026 को स्पॉट गोल्ड का कारोबार 4,440 डॉलर प्रति औंस...

बिजनेस डेस्कः साल 2026 की शुरुआत सोने ने ऐतिहासिक तेजी के साथ की है। 2025 के आखिर में अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहली बार सोना 4,500 डॉलर प्रति औंस यानी 31.1035 ग्राम (करीब 3.74 लाख रुपए) के पार पहुंचा। 7 जनवरी 2026 को स्पॉट गोल्ड का कारोबार 4,440 डॉलर प्रति औंस (लगभग 3.69 लाख रुपए) के आसपास रहा है। हालिया मुनाफावसूली से कीमतों में हल्की नरमी आई है लेकिन बाजार का रुझान अब भी तेजी का बना हुआ है। 

निवेशकों की नजर 4,450 डॉलर (करीब 3.69 लाख रुपए) के अहम रेजिस्टेंस लेवल पर है, जिसे पार करते ही सोना 4,600 डॉलर (लगभग 3.82 लाख रुपए) की ओर दौड़ सकता है। दिग्गज निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने 2026 की चौथी तिमाही तक सोने का लक्ष्य 4,800 डॉलर प्रति औंस तय किया है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 3.98 लाख से 4.0 लाख रुपए प्रति औंस बैठता है। बैंक का कहना है कि कमजोर अमरीकी डॉलर, फैडरल रिजर्व की संभावित नरम ब्याज नीति और नेतृत्व परिवर्तन जैसी परिस्थितियां सोने के लिए “परफैक्ट स्टॉर्म” तैयार कर रही हैं।

केंद्रीय बैंकों की आक्रामक खरीद

वैश्विक केंद्रीय बैंक लगातार सोना खरीद रहे हैं। उभरती अर्थव्यवस्थाएं डॉलर पर निर्भरता घटाकर अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रही हैं। बैंक ऑफ अमरीका के विश्लेषक माइकल विडमर के मुताबिक 2026 में सोने की औसत कीमत 4,538 डॉलर प्रति औंस (करीब 3.77 लाख रुपए) रह सकती है। घटती आपूर्ति और बढ़ती लागत कीमतों को मजबूत सहारा दे रही है। सोने-चांदी की ऊंची कीमतों का सीधा फायदा खनन कंपनियों को मिल रहा है। जब सोना 3.7 लाख डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना हुआ है, तो माइनिंग कंपनियों का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यही वजह है कि 2026 की शुरुआत में ही माइनिंग स्टॉक्स एस.एंड.पी.  500 के टॉप परफॉर्मर्स में शामिल हो गए हैं।

सोने की सप्लाई पर दबाव

जहां मांग तेजी से बढ़ रही है, वहीं सप्लाई मोर्चे पर चुनौतियां गहराती जा रही हैं। बैंक ऑफ अमरीका के अनुसार उत्तरी अमरीका की 13 प्रमुख खनन कंपनियों का उत्पादन 2026 में करीब 2 फीसदी घटकर 1.92 करोड़ औंस रह सकता है। खनन लागत बढ़कर 1,600 डॉलर प्रति औंस (करीब 1.33 लाख रुपए) तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे सोने की कीमतों के लिए एक मजबूत न्यूनतम स्तर बनता है।

दिसंबर में शेयर बाजार पर भारी पड़ा सोना

दिसंबर 2025 में निवेशकों ने शेयर बाजार की तुलना में गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) को ज्यादा तरजीह दी। सोने की कीमतों में तेज़ी और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच गोल्ड ईटीएफ में निवेश तीन गुना बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

म्यूचुअल फंड उद्योग की शीर्ष संस्था एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (ए.एम.एफ.आई.) के आंकड़ों के अनुसार दिसंबर 2025 में गोल्ड ई.टी.एफ. में शुद्ध निवेश बढ़कर 1,16,467 करोड़ रुपए हो गया, जो एक महीने पहले की तुलना में करीब तीन गुना अधिक है। यह अब तक का सबसे ऊंचा मासिक निवेश है।

चांदी बनी 2026 की हाई-ग्रोथ मेटल

सोने के साथ-साथ चांदी भी 2026 में निवेशकों की पसंद बनती जा रही है। जनवरी की शुरुआत में चांदी 80 डॉलर प्रति औंस (लगभग 6,600 रुपए) के पार पहुंच चुकी है। बैंक ऑफ अमरीका के मुताबिक गोल्ड-टू-सिल्वर रेशियो फिलहाल 60:1 के आसपास है। अगर यह अनुपात घटता है, तो चांदी 135 डॉलर से 300 डॉलर प्रति औंस, यानी करीब 11,200 रुपए से 24,900 रुपए तक जा सकती है। 2026 से चीन ने चांदी के निर्यात पर नई लाइसेंस व्यवस्था लागू की है। इसके तहत दुनिया की करीब 60–70 फीसदी रिफाइंड चांदी सप्लाई पर सरकारी मंजूरी जरूरी होगी। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे वैश्विक बाजार में चांदी की कीमतों पर और दबाव बनेगा।

सोने-चांदी की ऊंची कीमतों का सीधा फायदा खनन कंपनियों को मिल रहा है। जब सोना 3.7 लाख डॉलर प्रति औंस से ऊपर बना हुआ है, तो माइनिंग कंपनियों का मुनाफा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। यही वजह है कि 2026 की शुरुआत में ही माइनिंग स्टॉक्स एस.एंड.पी.  500 के टॉप परफॉर्मर्स में शामिल हो गए हैं।
 

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