प्याज की खेती पर ₹66,000 खर्च, ₹664 की कमाई, बारिश ने किया किसानों का हाल बेहाल

Edited By Updated: 22 Oct, 2025 10:34 AM

onion cultivation costs 66 000 earns 664 rains wreak havoc on farmers

महाराष्ट्र के किसानों के लिए यह साल बेहद कठिन साबित हो रहा है। लगातार बारिश ने फसलें बर्बाद कर दी है और जो थोड़ी-बहुत बची हैं, उनकी कीमतें इतनी गिर गई हैं कि बेचने पर भी किसानों को घाटा हो रहा है। प्याज, टमाटर, आलू, अनार और सोयाबीन जैसी फसलें इस बार...

बिजनेस डेस्कः महाराष्ट्र के किसानों के लिए यह साल बेहद कठिन साबित हो रहा है। लगातार बारिश ने फसलें बर्बाद कर दी है और जो थोड़ी-बहुत बची हैं, उनकी कीमतें इतनी गिर गई हैं कि बेचने पर भी किसानों को घाटा हो रहा है। प्याज, टमाटर, आलू, अनार और सोयाबीन जैसी फसलें इस बार किसानों की कमर तोड़ रही हैं।

प्याज की फसल से भारी नुकसान

एक रिपोर्ट के अनुसार, पुरंदर के किसान सुदाम इंगले ने पूरी मेहनत से प्याज की खेती की और करीब 66,000 रुपए खर्च किए लेकिन जब उन्होंने 7.5 क्विंटल प्याज मंडी में बेची, तो सिर्फ 664 रुपए ही हाथ आए। सुदाम इंगले ने कहा, “अब तो प्याज को खाद बना देना ही बेहतर है, बेचने में भी नुकसान है।”

अनार और सीताफल वाले किसान भी परेशान

सिर्फ प्याज ही नहीं, अनार और सीताफल उगाने वाले किसान भी भारी नुकसान झेल रहे हैं। किसान माणिकराव ज़ेंडे ने अनार पर 1.5 लाख रुपए और सीताफल पर 1 लाख रुपए खर्च किए लेकिन बारिश ने फसलें बर्बाद कर दीं। उन्हें मजबूरी में फसल जोतनी पड़ी क्योंकि बाजार में बिकने से घाटा और बढ़ रहा था।

मंडी में भी सन्नाटा

एशिया की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में हालत चिंताजनक है। यहां प्याज की कीमतें 500 से 1,400 रुपए प्रति क्विंटल तक हैं यानी औसतन 10-11 रुपए प्रति किलो। मार्च-अप्रैल में हुई बंपर फसल और लगातार बारिश ने प्याज की गुणवत्ता बिगाड़ दी। नासिक के एक अधिकारी के अनुसार, यहां की 80% प्याज की फसल बर्बाद हो चुकी है।

गांवों में त्योहारों की रौनक गायब

शहरों में दिवाली की चमक है लेकिन गांवों में स्थिति विपरीत है। ग्रामीण बाजार सूने हैं और लोगों के पास दीया खरीदने तक के पैसे नहीं हैं। रिपोर्ट के अनुसार, नासिक के APMC सदस्य का कहना है कि इस बार दिवाली केवल शहरों तक सीमित रह गई है।

बढ़ते आयात से नुकसान और बढ़ा

महाराष्ट्र में उत्तर प्रदेश और गुजरात से आयातित प्याज और आलू भी आ गए हैं, जिससे स्थानीय किसानों का नुकसान और बढ़ गया। सोयाबीन की फसल भी बारिश से बर्बाद हुई है।

सरकारी नीतियों पर सवाल

किसान और व्यापारी सरकार की नीतियों से नाराज हैं। जब प्याज के दाम बढ़ते हैं तो सरकार निर्यात रोक देती है और जब दाम गिरते हैं तो खरीद नहीं करती। किसानों का कहना है कि सरकार को नुकसान में साथ देना चाहिए।

त्योहारों के बाद क्या बदल सकता है?

रिपोर्ट के अनुसार, त्योहारों के बाद प्याज के दाम बढ़ सकते हैं लेकिन किसानों के पास बेचने लायक प्याज ही कम बची है और जो बची है, उसकी हालत खराब है, जिससे अच्छे दाम मिलना मुश्किल है।
 

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