RBI ने पंजाब सहित पांच राज्यों को चेताया, बढ़ता कर्ज कहीं देश में श्रीलंका जैसे विकट हालात न पैदा कर दे

Edited By jyoti choudhary, Updated: 22 Jun, 2022 12:10 PM

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रत्यक्ष रूप से राजस्थान सहित देश के पांच राज्यों पंजाब, बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल को वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए चेताया है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की अगुवाई में अर्थशास्त्रियों के एक दल...

बिजनेस डेस्कः भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अप्रत्यक्ष रूप से राजस्थान सहित देश के पांच राज्यों पंजाब, बिहार, केरल और पश्चिम बंगाल को वित्तीय स्थिति में सुधार के लिए चेताया है। रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल देवव्रत पात्रा की अगुवाई में अर्थशास्त्रियों के एक दल द्वारा तैयार आरबीआई के एक लेख में कहा गया कि पांच सबसे अधिक कर्जदार राज्य जिसमें राजस्थान भी शामिल है को अपने गैर-जरूरी चीजों पर खर्च में कटौती करने की जरूरत है।

इस लेख में सुझाव देते हुए कहा कि राजस्थान को अपने सुधारात्मक कार्रवाई के साथ अपनी वित्तीय स्थिति को ठीक करने की जरूरत है। ऋणगस्त राज्यों को पड़ोसी श्रीलंका में हालिया आर्थिक संकट को ध्यान में रखना चाहिए। श्रीलंका में भी आर्थिक स्थिति बिगड़ने का कारण हालात बिगड़े थे। लेख में कहा गया है कि कर्जदार राज्यों में पंजाब पर सबसे ज्यादा प्रभावित रहने की संभावना है। इसका ऋण से सकल राज्य घरेलू उत्पाद अनुपात 2026- 27 में 45% से अधिक होने का अनुमान है। राजस्थान, केरल और पश्चिम बंगाल में उस समय तक ऋण जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) अनुपात 35% से अधिक होने का अनुमान है। इन राज्यों को अपने ऋण स्तरों को स्थिर करने के लिए महत्वपूर्ण सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए।

कई कारणों का किया उल्लेख 
राज्यों के कर राजस्व में मंदी, प्रतिबद्ध व्यय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा और सब्सिडी के बढ़ते बोझ ने, राज्य सरकार के वित्त को बढ़ाया है, जो पहले से ही कोविड से तनावग्रस्त है। ‘गैर-मेरिट फ्रीबीज’ पर बढ़ते खर्च, आकस्मिक देनदारियों के विस्तार और डिस्कॉम के बढ़ते अतिदेय के रूप में जोखिम के नए स्रोत सामने आए हैं। 

1.61 लाख करोड़ का कर्ज
वित्त विभाग के आधिकारिक डेटा के अनुसार, गहलोत सरकार 2019 से लेकर सवा तीन साल में 1 लाख 61 हजार करोड़ का कर्ज ले चुकी है। वसुंधरा राजे की अगुवाई वाली बीजेपी सरकार ने पांच साल में 1 लाख 81 हजार करोड़ का कर्ज लिया था। सरकार सवा तीन साल में ही कर्ज लेने के मामले में उस आंकड़े के नजदीक पहुंच गई है।

राजस्थान के हर नागरिक पर 59 हजार का कर्ज
हाल ही में राजस्थान विधानसभा में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश पर कुल कर्ज 4 लाख 72 हजार करोड़ से ज्यादा हो चुका है। राज्य के प्रत्येक नागरिक पर करीब 59 हजार रुपए का कर्ज हो चुका है। कोरोनाकाल में प्रति व्यक्ति कर्ज का भार 1400 रुपए तक बढ़ा है। यह कर्जभार कोरोनाकाल में लिए गए कर्ज के कारण बढ़ा है। पुराने और नए कर्ज को मिलाकर सरकार सालाना 28 हजार करोड़ रुपए का ब्याज अदा कर रही है।

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