RBI के निर्णय का मकसद अर्थव्यवस्था को मजबूत करना: विशेषज्ञ

Edited By Updated: 08 Apr, 2026 05:51 PM

rbi s decision aims to strengthen the economy experts

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वृहत आर्थिक परिवेश को मजबूत करने की दिशा में सोच-विचार कर उठाया गया कदम है। विशेषज्ञों ने बुधवार को यह कहा। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की...

नई दिल्लीः भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नीतिगत दर में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वृहत आर्थिक परिवेश को मजबूत करने की दिशा में सोच-विचार कर उठाया गया कदम है। विशेषज्ञों ने बुधवार को यह कहा। आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो दर को 5.25 प्रतिशत बरकरार रखा है। उद्योग मंडल एसोचैम ने कहा कि यह फैसला आर्थिक परिवेश को स्थिर करने की दिशा में उठाया गया एक संतुलित कदम है। एसोचम के महासचिव सौरभ सान्याल ने कहा कि इससे यह साफ होता है कि केंद्रीय बैंक मौजूदा आर्थिक हालात का सावधानी से आकलन कर रहा है और जरूरत पड़ने पर कदम उठाने के लिए तैयार है। 

क्रिसिल की प्रधान अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने कहा कि आरबीआई का फैसला उम्मीद के मुताबिक है। पश्चिम एशिया के संघर्ष से पैदा हुई अनिश्चितताओं को देखते हुए सावधानी बरतना जरूरी है। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि आरबीआई की मौद्रिक नीति उम्मीद के अनुरूप है और ब्याज दर व रुख में कोई बदलाव नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत और महंगाई दर 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इससे संकेत मिलता है कि आगे ब्याज दर में कटौती की संभावना कम है, क्योंकि आरबीआई ने अल नीनो को भी महंगाई के लिए एक जोखिम बताया है। 

पीडब्ल्यूसी इंडिया के भागीदार और प्रमुख आर्थिक सलाहकार रानेन बनर्जी ने कहा कि पश्चिम एशिया में अनिश्चितताओं को देखते हुए एमपीसी ने सूझबूझ से काम किया है। उन्होंने कहा कि महंगाई के अनुमान बढ़ाए गए हैं, लेकिन फिर भी इसके सभी तिमाही में लक्ष्य के दायरे में रहने का अनुमान है। वहीं, आर्थिक वृद्धि के अनुमान कुछ कम किए गए हैं और आगे की स्थिति के अनुसार इनमें बदलाव हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस संघर्ष का असर ऊर्जा और परिवहन लागत पर पड़ सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर प्रभाव पड़ेगा।

आनंद राठी ग्रुप में मुख्य अर्थशास्त्री और कार्यकारी निदेशक सुजान हाजरा ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में तनाव के कारण महंगाई बढ़ने के जोखिम और आर्थिक वृद्धि के कमजोर पड़ने की आशंकाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने ब्याज दर और अपने रुख में कोई बदलाव नहीं किया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उम्मीद के मुताबिक है। आगे चलकर आरबीआई आंकड़ों के आधार पर ही निर्णय लेता रहेगा, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल नीतिगत दरों में लंबे समय तक कोई बदलाव की संभावना नहीं है। हाजरा ने कहा कि हालांकि बाजार में नकदी की स्थिति को सुगम बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी। कुल मिलाकर, इस नीति का असर शेयर बाजार, ऋण बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार पर तटस्थ से सकारात्मक होने का अनुमान है।  

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