Edited By Tanuja,Updated: 08 Apr, 2026 12:44 PM

इज़राइल में सियासी भूचाल मच गया है। विपक्ष नेता Yair Lapid ने पीएम Benjamin Netanyahu पर तीखा हमला बोलते हुए US-ईरान सीजफायर को “राजनीतिक आपदा” बताया और कहा कि इस फैसले में इज़राइल को दरकिनार किया गया।
International Desk: इज़राइल की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया, जब विपक्ष के नेता याइर लापिड (Yair Lapid) ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) पर तीखा हमला बोला। लैपिड ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए दो हफ्ते के युद्धविराम को “इज़राइल के इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक विफलता” बताया। उन्होंने कहा कि इस महत्वपूर्ण फैसले में इज़राइल को शामिल ही नहीं किया गया, जबकि यह सीधे उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा था। यानि अमेरिका और ईरान नेतन्याहू को बेवकूफ बना दिया और उनके बिना ही समझौते की ओर बढ़ रहे।
“सेना ने काम किया, सरकार फेल”
लैपिड ने कहा कि इज़राइली सेना ने अपना काम पूरी तरह से किया और जनता ने भी मजबूती दिखाई, लेकिन राजनीतिक स्तर पर नेतन्याहू पूरी तरह असफल रहे। उनके मुताबिक, सरकार अपने तय किए गए किसी भी लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाई। लैपिड ने नेतन्याहू पर “अहंकार, लापरवाही और रणनीति की कमी” जैसे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इस गलती से हुए नुकसान की भरपाई करने में इज़राइल को कई साल लग सकते हैं।
इजराइल ने फिर भी किया समर्थन
हालांकि इन आलोचनाओं के बीच नेतन्याहू सरकार ने Donald Trump के फैसले का समर्थन किया है। सरकार ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ दो हफ्ते के लिए हमले रोकने के अमेरिकी फैसले के साथ है, बशर्ते ईरान सभी हमले बंद करे और Strait of Hormuz को खोल दे। इज़राइल ने साफ किया है कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होता।दक्षिण लेबनान में Hezbollah के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेगा, क्योंकि इज़राइल इसे ईरान समर्थित बड़ा खतरा मानता है।